उर्दू के जाने-माने लेखक सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई 1912 को हुआ था। 18 जनवरी 1955 को उनका देहांत हो गया। अपनी लेखनी से समाज के चेहरे को तार-तार कर देने वाले सआदत हसन ‘मंटो’ को पहले लोगों ने साहित्यकार मानने से इंकार कर दिया था।
अपनी लघु कथाओं… बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए सआदत हसन मंटो कहानीकार होने के साथ-साथ फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक तथा पत्रकार भी थे।
अपने छोटे से जीवनकाल में सआदत हसन मंटो ने 22 लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्रों के दो संग्रह प्रकाशित किए।
कहानियों में अश्लीलता के आरोपों की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार उनके ऊपर आरोप साबित नहीं हो पाए। मंटो की कुछ रचनाओं का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया हुआ।
मंटो ने भी रूसी कथाकार आंतोन चेखव की तरह अपनी कहानियों के दम पर अपनी पहचान बनाई।
कहते हैं कि भारत पाकिस्तान बंटवारे के बाद मंटो पागल हो गए थे। उसी पागल दिमाग से निकली उनकी कहानी ‘खोल दो’ यथार्थ से दो-दो हाथ करती है।
मंटो ने एकबार कहा था- मैं अफ़साना नहीं लिखता, अफ़साना मुझे लिखता है। कभी-कभी हैरत होती है कि यह कौन है, जिसने इतने अच्छे अफ़साने लिखे हैं?
“मेरा कलम उठाना एक बहुत बड़ी घटना थी, जिससे ‘शिष्ट’ लेखकों को भी दुख हुआ और ‘शिष्ट’ पाठकों को भी”
-Legend News
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