सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को वैक्सीन लगवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने ये भी कहा कि वह इस बात से संतुष्ट है कि मौजूदा वैक्सीन नीति को अनुचित और मनमाना नहीं कहा जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार नीति बना सकती है और जनता की भलाई के लिए कुछ शर्तें लागू की जा सकती है.
कोर्ट ने कहा कि कुछ राज्य सरकारों की ओर से लगाई गई शर्त, सार्वजनिक स्थानों पर वैक्सीन न लेने वाले लोगों को प्रतिबंधित करने का क़दम ठीक नहीं है और इसे वापस लेना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कोविड-19 टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों पर डेटा सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया है.
राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह टीकाकरण ( NTAGI) के पूर्व सदस्य डॉ जैकब पुलियल ने सुप्रीम कोर्ट में वैक्सीन को अनिवार्य बनाने के खिलाफ़ और क्लीनिकल डेटा को सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका दायर की थी.
याचिका में कहा गया कि केंद्र का कहना है कि वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है, लेकिन राज्यों ने इसे अनिवार्य कर दिया है.
-एजेंसियां
- आगरा एमजी रोड मेट्रो बैरिकेडिंग पर गरमाया विवाद: पेड़ों की अनुमति से पहले सड़क घेरने पर मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने उठाया सवाल - August 13, 2026
- बागपत में डबल मर्डर से सनसनी: 25 जुलाई से लापता दो दोस्तों के शव मंदिर के प्रांगण में गड्ढे से बरामद, पुजारी पर हत्या का आरोप, दो शिष्य गिरफ्तार - August 13, 2026
- यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मास्टरस्ट्रोक की तैयारी: महिलाओं को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने पर चल रहा मंथन - August 13, 2026