सफलता की कहानी: आगरा के बिचपुरी में मशरूम की खेती से बदली किसानों की तकदीर; नाबार्ड-डीईआई की ट्रेनिंग ने दिखाए नए रास्ते

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आगरा: ताजनगरी के किसान अब गेहूं-आलू की परंपरागत खेती से आगे बढ़कर ‘मशरूम क्रांति’ का हिस्सा बन रहे हैं। बिचपुरी ब्लॉक के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नाबार्ड (NABARD) और दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) द्वारा चलाया गया विशेष प्रशिक्षण अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस पहल ने न केवल किसानों के कौशल को निखारा है, बल्कि उनकी आमदनी में भी इजाफा किया है।

​चार चरणों में मिला हुनर का वरदान

वर्ष 2024 से शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत चार अलग-अलग बैचों में किसानों को मशरूम उत्पादन की बारीकियां सिखाई गईं। 7-7 दिनों की इस निःशुल्क ट्रेनिंग में मशरूम उगाने से लेकर उसकी मार्केटिंग, क्वालिटी कंट्रोल और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (जैसे पाउडर, अचार आदि) बनाने की ट्रेनिंग दी गई।

तकनीकी ज्ञान के साथ मिला आर्थिक सहयोग

सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि नाबार्ड ने 16 प्रगतिशील किसानों को मशरूम उगाने के लिए विशेष झोपड़ियाँ (शेड) बनाने हेतु वित्तीय सहायता भी प्रदान की। प्रशिक्षण का ही परिणाम है कि बिचपुरी के कई किसानों ने बटन और ऑयस्टर मशरूम का सफल उत्पादन कर दिखाया है।

महिलाओं और छोटे किसानों के लिए वरदान

इस प्रोजेक्ट ने ग्रामीण महिलाओं के लिए घर की चारदीवारी के भीतर ही आय का नया जरिया खोल दिया है। ऑयस्टर मशरूम कम लागत और कम जगह में आसानी से उग जाता है, जिससे छोटे किसानों और महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी बढ़ती मांग किसानों को मोटा मुनाफा दे रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh