आगरा: आगरा के दीवानी न्यायालय परिसर में सोमवार का नजारा उस वक्त बेहद हैरान कर देने वाला रहा, जब एक व्यक्ति कॉकरोच की वेशभूषा पहनकर जमीन पर रेंगते हुए अदालत पहुँचा। यह युवक निलंबित फायरमैन जितेंद्र राठौर था, जिसने अपने ऊपर लगे कथित फर्जी मुकदमों के खिलाफ विरोध का यह अनोखा और प्रतीकात्मक तरीका चुना।
”शिक्षा माफिया के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सजा”
जितेंद्र राठौर का दावा है कि वर्ष 2024 में थाना न्यू आगरा में एक छात्रा से कथित छेड़छाड़ का जो मुकदमा उन पर दर्ज किया गया, वह पूरी तरह से झूठा और साजिशन है। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय वे दूसरे जिले में अपनी सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे।
जितेंद्र के अनुसार, यह मुकदमा उन्हें केवल इसलिए फंसाने के लिए दर्ज कराया गया क्योंकि उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका कहना है कि आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल की जांच में भी उनके पक्ष में रिपोर्ट आई थी, लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
निलंबन और आर्थिक तंगी से टूटा मनोबल
जितेंद्र ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि 15 फरवरी 2026 को उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया, जिससे उनका करियर और आर्थिक स्थिति दोनों डगमगा गई हैं। उन्होंने यूजीसी-नेट (गणित) जैसी कठिन परीक्षा भी पास की है, लेकिन लंबित मुकदमे के कारण वे नई नौकरी या अवसरों का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। झूठे आरोपों के चलते उन्हें सामाजिक अपमान और परिवार के साथ गहरे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
सुरक्षा घेरे में रुका विरोध
दीवानी गेट पर एसएसएफ (SSF) जवानों ने जब कॉकरोच की वेशभूषा में रेंगते हुए जितेंद्र को देखा, तो उन्हें मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोक लिया। इसके बाद उन्होंने गेट पर खड़े होकर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने और एक निष्पक्ष जांच कराने की अपील की। जितेंद्र का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और दोषी साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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