लखनऊ/कन्नौज: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज में जिला इकाई के भंग होने के बाद से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया है। राजभर ने कहा कि मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव ने कड़ी मेहनत से कन्नौज को सपा का मजबूत गढ़ बनाया था, लेकिन वर्तमान नेतृत्व इस राजनीतिक विरासत को सहेजने में विफल साबित हो रहा है।
अखिलेश अपने पिता और चाचा की साइकिल का हैंडल नहीं संभाल पाए
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि जब पार्टी अध्यक्ष खुद वातानुकूलित कमरों (AC), पीसी और सोशल मीडिया (ट्विटर) की आभासी दुनिया से बाहर नहीं निकलेंगे, तो जैमीनी स्तर पर जिला इकाई के नेता क्या काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज अब समाजवादी पार्टी को पूरी तरह खारिज कर चुका है।
राजभर ने तंज कसते हुए आगे कहा कि पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता पहले ही किनारा कर चुके हैं और अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव की चलाई हुई ‘साइकिल’ का हैंडल भी ठीक से थाम नहीं पा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि इसी वजह से उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा का राजनीतिक वजूद समाप्त हो जाएगा।
क्यों भंग हुई कन्नौज की पूरी जिला इकाई?
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी अक्सर सत्ताधारी बीजेपी के कार्यक्रमों में खाली कुर्सियों को लेकर तंज कसती रही है, लेकिन हाल ही में कन्नौज में पार्टी के अपने ही ‘PDA कार्यकर्ता सम्मेलन’ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसमें कार्यक्रम स्थल पर कुर्सियाँ सूखी और खाली नजर आईं।
यह कार्यक्रम किसी बड़े मैदान के बजाय पार्टी कार्यालय में आयोजित किया गया था, जहाँ प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। मंच पर नेता तो बैठे थे, लेकिन सामने कार्यकर्ताओं की भारी कमी खटक रही थी। इस लचर व्यवस्था और भीड़ न जुटने के वीडियो वायरल होने के बाद सपा नेतृत्व ने कड़ा कदम उठाते हुए कन्नौज की पूरी जिला इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। चूंकि कन्नौज को खुद अखिलेश और डिंपल यादव का प्रमुख संसदीय क्षेत्र माना जाता है, इसलिए इस कार्रवाई को पार्टी के भीतर एक बड़ा झटका और आंतरिक कलह का संकेत माना जा रहा है।
एटा, कासगंज और गोरखपुर में भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने किसी जिले का संगठनात्मक ढांचा इस तरह रातों-रात भंग किया हो। इससे पहले एटा और कासगंज में भी स्थानीय नेताओं के साथ आपसी खींचतान और तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद दोनों जिलों की इकाइयों को भंग कर दिया गया था। इसके अलावा गोरखपुर में भी एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी के दो नेताओं के बीच हुई झड़प के बाद सख्त कार्रवाई की गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन लगातार हो रहे बदलावों के जरिए सपा प्रमुख पार्टी के भीतर अनुशासन का कड़ा संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
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