आगरा: ताजनगरी के बाह क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक को उनके ही उधार दिए गए रुपयों के जाल में ऐसा फंसाया गया कि वे अपनी जमापूंजी गंवा बैठे। आरोपी ने उधार ली गई रकम लौटाने के बजाय पुलिस के बड़े अधिकारियों एसआई से लेकर डीआईजी तक के नाम का खौफ दिखाकर बुजुर्ग से लगातार लाखों रुपये वसूल लिए। हालांकि, बेटों की सतर्कता से इस शातिर ठगी का पर्दाफाश हो गया। बाह थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर उसके पास से 14 लाख 71 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं।
दुकान के परिचय का उठाया फायदा और शुरू हुआ उधार का खेल
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, बाह निवासी उमाशंकर गुप्ता एक रिटायर्ड शिक्षक हैं और अपनी आजीविका चलाने के लिए परचून की दुकान चलाते हैं। स्थानीय निवासी रमेश बरुआ उनकी दुकान से सामान खरीदता था, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई। आरोप है कि रमेश ने अपनी सख्त जरूरत का हवाला देकर उमाशंकर से 15 लाख रुपये उधार मांगे। बुजुर्ग ने विश्वास करते हुए अपने बैंक खाते से निकालकर उसे यह रकम दे दी।
जब काफी समय बीतने के बाद भी रमेश ने पैसे वापस नहीं किए, तो शिक्षक ने तकादा शुरू किया। इसके बाद रमेश अपने बेटे अनंत बरुआ उर्फ रिशु बरुआ को साथ लेकर उनके पास आया और जल्द ही उधारी चुकाने का आश्वासन दिया। लेकिन इसके साथ ही अनंत ने बुजुर्ग को धमकी देनी शुरू कर दी कि यदि उन्होंने दोबारा पैसे मांगे तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
मोबाइल पर पुलिस का लोगो और अधिकारियों के नाम पर वसूली
साजिश के अगले चरण में, 14 सितंबर को अनंत ने बुजुर्ग के मोबाइल पर कॉल कर एक नई कहानी गढ़ी। उसने बताया कि वह नकदी से भरा बैग लेकर उधारी चुकाने आ रहा था, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उसे पकड़ लिया है और उसने पुलिस को यह भी बता दिया है कि रकम उमाशंकर की है।
इसके तुरंत बाद, बुजुर्ग के व्हाट्सएप पर कथित तौर पर पुलिस के एक सब-inspector (एसआई) का लोगो लगाकर कॉल की गई। पुलिस कार्रवाई के डर से सहमे बुजुर्ग ने सच बता दिया कि वह रकम उनकी ही है। इसके बाद शुरू हुआ असली ठगी का खेल। कथित एसआई के नाम से शुरू हुई यह डराने-धमकाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे थाना इंस्पेक्टर, एसीपी, पुलिस कमिश्नर और डीआईजी के स्तर तक पहुँच गई। हर बार अधिकारी का पदनाम बदलते ही मांग जाने वाली रकम और बड़ी होती गई।
कंगाल हो चुके बुजुर्ग, बेटों के शक ने खोला राज
डराए जाने के कारण बुजुर्ग अपनी सारी जमापूंजी गंवा चुके थे, और मांग पूरी करने के लिए वे अपने रिश्तेदारों से उधार मांग-मांगकर आरोपी को पैसे दे रहे थे। यह सिलसिला तब थमा जब बुजुर्ग के छोटे बेटे अमन को यह भनक लगी कि उनके पिता लगातार रिश्तेदारों से रुपये मांग रहे हैं। बेटों ने जब पिता से कड़ाई से पूछताछ की, तो इस शातिर ठगी का पूरा काला चिट्ठा सामने आया।
जब बुजुर्ग ने आरोपी अनंत से संपर्क किया, तो उसने जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली और बाह थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी, 14.71 लाख रुपये बरामद
पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस आयुक्त और डीसीपी पूर्वी के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत दबिश दी। 19 अक्टूबर को बाह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 20 वर्षीय आरोपी अनंत बरुआ पुत्र रमेश बरुआ (निवासी मोहल्ला सराय, बाह) को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर ठगी गई रकम में से 14 लाख 71 हजार रुपये सकुशल बरामद कर लिए हैं। इस संबंध में थाना बाह पर मुकदमा संख्या 234/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 316(2), 308(5), 351(3) और 61(2) के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस सफल खुलासे में प्रभारी निरीक्षक द्विवेदी प्रसाद तिवारी और उनकी टीम के अन्य पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही।
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