आगरा। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सलाह से मोदी सरकार ने सिविल सेवा कर्मियों की जगह अब संघ लोक सेवा आयोग ने निजी क्षेत्र से संयुक्त सचिव, उप-सचिव और निदेशक स्तर पर नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन निकाला है। इसमें कोई सरकारी कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकता। इसमें संविधान प्रदत आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। कारपोरेट में काम कर रहे बीजेपी मानसिकता वाले लोगों को सीधे भारत सरकार के महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों में उच्च पदों पर बैठाने का यह भाजपाई मॉडल है।
सांसद सुमन ने कहा कि इसके तहत नियुक्ति प्रक्रिया में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिलेगा। वंचितों के अधिकारों पर एनडीए के लोग डाका डाल रहे है।
आरक्षण विरोधी भाजपाई मानसिकता का जीता जगता उदाहरण 69 हजार की शिक्षक भर्ती में हुआ आरक्षण घोटाला है । आश्चर्य का विषय है आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी उपरोक्त भर्ती घोटाले के विरुद्ध कई वर्षों से आंदोलनरत रहे परन्तु सरकार ने सुध नहीं ली। भाजपा सरकार में स्वाभिमान गिरवी रखकर आरक्षित वर्ग के जनप्रतिनिधि उच्च न्यायालय के आदेश का आज स्वागत कर रहे है।
भाजपा का आरक्षण विरोधी मूल चरित्र अब पूर्ण रूप से उजागर हो गया है। देश प्रदेश की एक बड़ी आबादी अपने साथ हो रहे सामाजिक अन्याय के विरुद्ध भाजपा को जवाब देने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करने के लिए तैयार है। वार्ता के दौरान वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र यादव, पूर्व जिला महासचिव सलीम शाह, मोइन बाबू आदि मौजूद रहे।
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