Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। हैलंत बोली वचनंत गारी, करील वृक्ष कूप जल खारी, ये देखी कान्हा, मधुपुरी तुम्हारी। कान्हा की नगरी को देख कर किसी कवि ने ये पंक्तियां कब कहीं कोई नहीं जानता। अब करील के वृक्ष भी नहीं रहे हैं और कान्हा की नगरी से कूंआ भी समाप्त हो रहे हैं। बोली भी बदली है, अगर कुछ नहीं बदला है तो वह है खारी पानी। इस खारी पानी की वजह से जनपद में सैकडों हैक्टेयर भूमि बंजर पडी हुई। किसानों के पास खेत तो हैं लेकिन इन में खेती नहीं होती है।
-खारे पानी की वजह से जनपद में बंजर पडी है हजरों हैक्टेयर भूमि
खारे पानी की जमीन को उपयोगी बनाने के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं। इनमें से एक योजना मत्स्य पालन भी है। झींगा मछली खारे पानी में ही रहती है, इस और अब जनपद के किसानों का भी ध्यान गया है।
सहायक निदेशक मत्स्य डा. महेश चौहान का कहना है कि जनपद मथुरा के विकास खण्ड छाता, चैमुहां, नौहझील, मांट तथा गोवर्धन में काफी मात्रा में खारे पानी की भूमि यानी सैलाइन भूमि है, जो निष्प्रयोज्य पड़ी है या कम पैदावर होती है। जिससे भू-स्वामियों अथवा कृषकों को कम आय प्राप्त हो रही है। वर्तमान में मत्स्य विभाग में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत सैलाइन भूमि में खारा पानी झींगा व मत्स्य पालन हेतु तालाबों के निर्माण व निवेश की योजना क्रियान्वियत है। उन्होंने बताया कि खारी पानी में उचित तकनीकी से झींगा व मछली पालन से कृषकों की खेती से अधिक पैदावर व आय प्राप्त होगी। मत्स्य विभाग में एक हैक्टेयर (12 से 14 बीघा कच्चा) भूमि पर तालाब निर्माण कराने पर प्रोजेक्ट लागत 9.50 लाख पर सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत एवं अनु.जा.जनजाति व महिला को 60 प्रतिशत अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। ऐसे किसान जिनके पास सैलाइन भूमि के साथ-साथ खारा पानी की प्रचूर मात्रा में उपलब्धता है, तो खारा पानी झींगा व मत्स्य पालन के लिए इन सरकारी येाजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
-सरकारी मदद से किसान खारे पानी की भूमि से भी पैदा कर सकेंगे पैसा
जनपद के सहायक निदेशक मत्स्य के मोबाइल नम्बर 9568910333 से सम्पर्क कर खसरा खतौनी उपलब्ध कराते हुए विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन करा दें।
खारा पानी किसानों के लिए और जमीन के लिए भी अभिशाप ही माना जाता रहा है। दुश्वारियों से सफलता का रास्ता निकलता है, इसी तरह जनपद के किसानों के लिए यह अभिशाप वरदान बन सकता है। जरूरत है तो सिर्फ वैज्ञानिक सोच और सरकारी अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल की। झींगा मछली को सिर्फ खारे पानी में ही पैदा किया जा सकता है। आज बाजार में इसकी मांग है। किसान हिम्मत दिखाएं और सरकारी अधिकारी इमानदारी तो किसानों की तकदीर बदल सकती है। -दिलीप यादव, कृषि विषेषज्ञ
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