Agra (Uttar Pradesh, India)। पितृ पक्ष दो सितम्बर, 2020 से शुरू हो रहे हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि पितृ लोक कहां है और उससे आगे क्या होता है। बहुत जिज्ञासा होती है आखिर ये पितृदोष है क्या? पितृ -दोष शांति के सरल उपाय पितृ या पितृ गण कौन हैं? आपकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास किय जा रहा है।
मनुष्य लोक से ऊपर है पितृ लोक
पितृ गण हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है, क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है, पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है। आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है ,वहाँ हमारे पूर्वज मिलते हैं अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं कि इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढ़ती है।
मोह वश अपने कुल में जन्म
सूर्य लोक से आगे, यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को भेज कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है,लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है ,जो परमात्मा में समाहित होती है और जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता । मनुष्य लोक एवं पितृ लोक में बहुत सारी आत्माएं पुनः अपनी इच्छा वश, मोह वश अपने कुल में जन्म लेती हैं।
पूर्णिमा श्राद्ध – 2/9/20, बुधवार
1. प्रतिपदा श्राद्ध – 3/9/20 गुरुवार
2. द्वितीया श्राद्ध – 4/9/20 शुक्रवार
3. तृतीया श्राद्ध- 5/9/20 शनिवार
4. चतुर्थी श्राद्ध-6/9/20 रविवार
5. पंचमी श्राद्ध- 7/9/20 सोमवार
6. षष्ठी श्राद्ध-8/9/20 मंगलवार
7. सप्तमी श्राद्ध- 9/9/20 बुधवार
8. अष्टमी श्राद्ध- 10/9/20 गुरुवार
9. नवमी श्राद्ध- 11/9/20 शुक्रवार
10. दशमी श्राद्ध- 12/9/20 शनिवार
11. एकादशी श्राद्ध- 13/9/20 रविवार
12. द्वादशी श्राद्ध- 14/9/20 सोमवार
13. त्रयोदशी श्राद्ध- 15/9/20 मंगलवार
14. चतुर्दशी श्राद्ध- 16/9/20 बुधवार
15. सर्वपितृ अमावस श्राद्ध 17/9/20 गुरुवार
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