सरकार से सहायता प्राप्त स्कूल की करतूत जानिए, फिर प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ झंडा उठाइए
Agra (Uttar Pradesh, India)। सरकार ने कोरोना महामारी के चलते लौकडाउन के कारण पैदा हुई परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वित्तहीन प्राइवेट स्कूलों के लिए आदेश जारी किए हैं-
1. अभिभावक अगर चाहें तो अपनी सुविधा अनुसार अपने बच्चों की फीस त्रैमासिक जमा न करके मासिक जमा कर सकते हैं।
2. विद्यालयों द्वारा किसी भी प्रकार से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा l
3. और न ही किसी प्रकार का विलंब शुल्क लिया जाएगा।
4. एडवांस महीनों की फीस नहीं माँगी जाएगी l
5. किसी भी बच्चे की फीस जमा न होने पर नाम नहीं काटा जाएगा l
6. किसी भी बच्चे की फीस जमा न होने पर ऑनलाइन क्लास से वंचित नहीं किया जाए l
7.प्राइवेट स्कूलों के द्वारा सरकारी आदेश का पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पूरी तरह सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा शासन के आदेश की खुली अवहेलना हो रही है।
केवी स्कूल की बात
इसी तथ्य को दर्शाने के लिए केंद्रीय विद्यालय 1 (केवी-1 आगरा कैंट एयर फोर्स) की कक्षा सात की छात्रा कनिष्का सिंह की फीस की रसीद साथ में संलग्न की गई है। इस बिटिया के पिता हुकुम सिंह का देहांत 5 वर्ष पूर्व हो गया है। और बिटिया के मौसा राजीव पाराशर ( 8445269924) प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके द्वारा अध्ययन का खर्च उठाया जा रहा है। लॉकडाउन के कारण हुई परेशानी के चलते बच्ची की फीस समय पर जमा नहीं की गई। इस कारण बिटिया का नाम विद्यालय से काट दिया गया। बाद में बच्ची के अभिभावक ने पूरी फीस जमा की और नाम फिर से दर्ज किया गया।

अप्सा के सचिव डॉ. गिरधर शर्मा ने उठाए सवाल
शासन द्वारा जारी आदेश सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। पर इसे देखकर तो यही लगता है कि सरकारी एवं निजी स्कूलों में भेदभाव किया जा रहा है। आखिर क्यों?
इस संलग्न रसीद में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि सरकारी आदेश के वाबजूद केंद्रीय विद्यालय में मासिक नहीं बल्कि त्रैमासिक फीस ली जा रही है, जबकि निजी स्कूलों से मासिक शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है। इस प्रकार की दोहरी नीति क्यों?
बिटिया के परिजनों द्वारा फीस लेट जमा करने पर रु. 80/- विलम्ब शुल्क लिया गया l
चूँकि 30 जून तक फीस नहीं जमा कराई और लिंक बंद हो गया, उसके पुनः प्रवेश का शुल्क रु. 100/- भी लिया गया ।
जुलाई में लिंक खुलने के बाद जब फीस जमा कराई तो एडवांस में जुलाई, अगस्त एवं सितम्बर की फीस जमा कराई l
उम्मीद है स्कूल प्रशासन बिटिया के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा l
सरकारी स्कूलों में यह सब खुलेआम हो रहा है और प्राइवेट स्कूलों के लिए नियम अलग क्यों?
निजी स्कूलों को कोई सरकारी मदद नहीं मिलती
निजी स्कूलों के संचालन में किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद सरकार से नहीं मिलती। उनका संचालन पूरी तरह अभिभावकों से मिलने वाली फीस से किया जाता है। जबकि सरकारी स्कूलों में समस्त खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। फीस जमा न करने पर विद्यालय से जुड़े सभी लोगों के वेतन एवं कार्यों को पूरा करने में प्रबंधतंत्र को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्या सारे नियम केवल प्राइवेट स्कूलों के लिए ही बनाए गए हैं?
अप्सा के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने दिया निःशुल्क पढ़ाई का प्रस्ताव
एसोसिएशन ऑफ़ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ़ आगरा (अप्सा) के अध्यक्ष एवं रीजिनल कन्वीनर, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड नेशनल इंडिपेंडेंस स्कूल एलायन्स (NISA) डॉ. सुशील गुप्ता ने बिटिया की पारिवारिक स्थिति को देखते हुए कहा है कि बिटिया अगर चाहे तो केंद्रीय विद्यालय का उसका वर्ष भर का सारा शैक्षणिक खर्च वह वहन करने को तत्पर हैं। बिटिया चाहे तो उनके स्कूल प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में निःशुल्क पढ़ सकती है। बस का किराया, किताब, कॉपी आदि के लिए भी कोई धनराशि नहीं लेंगे।
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