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Agra, Uttar Pradesh, India. ताजमहल के शहर आगरा में चातुर्मास कर रहीं परमविदुषी साध्वी वैराग्य निधि महाराज साहब, साध्वी जयणा श्री जी महाराज साहब, साध्वी श्री ऋजुमना श्री जी महाराज साहब की विदाई का समय आ गया है। इससे पूर्व जैन दादाबाड़ी शाहगंज में ‘क्या खोया क्या पाया’ विषय पर रोचक चर्चा हुई। साध्वी महाराज को उनकी गलतियों भी बताई गईं। कई गलतियां की हैं।
लोहामंडी संघ के सुशील जैन ने 10 मिनट तक विचार रखे। उन्होंने कहा कि अगले जन्म में आपको गुरु के रूप में प्राप्त करूंगा। यह भी कहा कि आपके संघ में आगरा से कई श्रावक दीक्षा लेकर शामिल हो सकते हैं। उन्होंने वैराग्य निधि महाराज की त्रुटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आपने हमें अपने मोहपाश में बांध लिया है। गौतम स्वामी भी मोह में बंध गए थे। हमें वह केवल ज्ञान दो जिससे आपके मोह से मुक्त हो सकें। सबसे बड़ी गलती तो यह हुई कि कोई गलती नहीं की। आप यहां से जा सकते हैं लेकिन हमारे हृदय से निकलकर दिखाओ तो जानें। राजुकमार जैन कि ध्यान फैक्ट्री पर रहता था लेकिन आपके आने के बाद उन्होंने श्रावक का धर्म निभाया।
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार जैन ने कहा कि साध्वी जी ने हमें वास्तविक जीने की कला सिखाई। हमारा जीवन बदल दिया। चातुर्मास समिति के संयोजक सुनील कुमार जैन ने कहा कि साध्वी जी ने हम जैसे अनेक लोगों की जीवन बदल दिया है। संचालन करते हुए दुष्यंत जैन ने इस चातुर्मास में हुए विशेष कार्यों का ब्योरा रखा।
श्रावक और श्राविकाओं ने वैराग्य निधि महाराज के प्रति श्रद्धा के भाव शब्दों में प्रकट किए। उनके यहां से न जाने की अनुनय-विनय की। अगला चौमासा भी आगरा में करने की प्रार्थना की। साध्वी जी के कारण जिन श्रावकों के जीवन में बदलाव आया है, उनके नेत्र सजल हो गए। इस मौके पर जीव दया के अंतर्गत 50 से अधिक कबूतरों को आजाद किया गया।
श्रावकों ने कहा- साध्वी जी ने चातुर्मास में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने पूजा का वैज्ञानिक महत्व प्रतिपादित किया है। श्रद्धालुओं का चाल और चरित्र बदला है। इस कारण साध्वी जी की विदाई की वेला में हर कोई द्रवित है। इतने विचार थे कि कार्यक्रम आधा घंटा के स्थान पर दो घंटा चला। पहली बार साध्वी जी के सामने खुलकर बोलने का अवसर मिला।
रुचि लोढ़ा, शिल्पा जैन, महेंद्र जैन, बृजेंद्र लोढ़ा, शरद, अजय चौरड़िया, रॉबिन जैन, रीटा लालवानी, आयुषी जैन, पूर्वा जैन ने विचार रखे। पारुल सिंघल ने नृत्य की प्रस्तुति दी।
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