शाहजहांपुर/बरेली। इस्तीफा देने के बाद चर्चा में आए निलंबित पीसीएस अधिकारी और बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बृहस्पतिवार को शाहजहांपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान शासन और सत्ता पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज का लोकतंत्र विफल होता दिख रहा है, इसी घुटन की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
भाजपा और जनप्रतिनिधियों पर कड़ा प्रहार
अलंकार अग्निहोत्री ने सत्तारूढ़ भाजपा की तुलना ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ से करते हुए कहा कि अधिकांश नेता केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के सहारे चुनाव जीतते हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि जिन नेताओं का अपना कोई व्यक्तिगत जनाधार नहीं है, वे यूजीसी के नए नियमों और सामान्य वर्ग की समस्याओं पर मौन साधे हुए हैं। उन्होंने ब्रजभूषण शरण सिंह और राजा भैया जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि केवल अपने दम पर चुनाव जीतने वाले नेताओं ने ही जनहित में आवाज उठाई है।
नई राजनीतिक पारी के संकेत
प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे भविष्य की योजना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से एक नए ‘विकल्प’ की तैयारी की बात कही। उन्होंने कहा, “सामान्य और ओबीसी वर्ग जिस दुर्गति का सामना कर रहे हैं, उसके लिए हम जल्द ही एक विकल्प पेश करेंगे।” उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में उनके राजनीति में कदम रखने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी नियमों का विरोध
अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट के विरोध के साथ-साथ यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशव्यापी असंतोष का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले नेताओं से अपील की कि वे अपने कुल गौरव का ध्यान रखें और इन नियमों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाएं। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता भी मौजूद रहे।
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