हाल ही में हुए खाने के एहसास से संबंधित शोध में यह खुलासा हुआ है। इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने खाने की सुगंध वाले छोटे-छोटे गोले बनाए। जब इन गोलों को प्रयोग में शामिल बुजुर्गों के पास ले गए, तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो उठीं।
इन यादों को इंग्लैंड की लेनकेस्टर यूनिवर्सिटी (Lancaster University) के प्रोफेसर कोरिना सास और डॉ टॉम गेलर ने 3डी प्रिंटेड फ्लेवर-आधारित संकेतों की सहायता से रिकाॅर्ड किया। शोध में 12 बुजुर्गों की 72 यादों में खाने को लेकर पुराना एहसास फिर सामने आया। इसके साथ ही उस दौर की घटनाएं भी सामने आईं।
भूलने की बीमारी होने पर काम करती है यह सुगंध
शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ प्रतिभागियों में भूलने की बीमारी थी। जब उनके सामने खाने की महक पहुंची तो वे भी अपने जमाने के भाेजन की तारीफ करते हुए घटनाओं को याद करने लगे। उन्होंने महसूस किया कि यह कुछ ऐसा है, जिसके बारे में उसे बहुत पहले से पता था।
अब ये तय हो गया कि कई बार भोजन की सुगंध पाकर हमें स्वाद के अलावा इससे जुड़ी कुछ विशेष घटनाएं भी याद आ जाती हैं। इनका एहसास हमारे मन में लंबे समय तक बना रहता है, जबकि घटनाएं हमें याद नहीं रहती। इतना ही नहीं, बुजुर्गों को अगर खाने की सुगंध आती है, तो इससे दिमाग सक्रिय हो जाता है। वे अतीत में पहुंच जाते हैं।
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