कभी देश का सोना गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा रिजर्व रखने वाला देश बन गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले 10 सालों में दोगुना बढ़कर 616.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आरबीआई द्वारा जारी यह आंकड़ा 26 जनवरी 2024 तक का है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक देश किसी भी बाहरी आर्थिक संकट या जोखिम से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बता दें कि सरकार इस भंडार की मदद से बाहरी दायित्वों को आसानी से पूरा कर सकती है। जानकारों का मानना है कि 10 सालों में जिस तरह से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोत्तरी हुई है वह वर्तमान सरकार के द्वारा उठाए गए सख्त कदमों का परिणाम है।
2019 में 454.94 अरब डॉलर था विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबकि पिछले पांच वर्षों में भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ता रहा है। 20 दिसंबर 2019 को यह 454.94 अरब डॉलर था, जो 25 दिसंबर 2020 को बढ़कर 581.13 अरब डॉलर हो गया। 8 सितंबर 2021 को भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 642.45 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। फिर 23 दिसंबर, 2022 में इसमें गिरावट भी दर्ज की गई और यह घटकर 562.80 अरब डॉलर रह रह गया। दिसम्बर 2023 में यह बढ़कर 623 अरब डॉलर पर पहुंचा था।
सरकार के इन फैसलों का असर
1. सरकारी नीतियों में कई बड़े सुधार
2. व्यापार संतुलन
3. नियंत्रित मुद्रास्फीति
4. स्थिर शेयर बाजार
5. विदेशी निवेशक आकर्षित हुए
क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से जारी की जाने वाली मुद्राओं को शामिल किया जाता है। इसमें मुद्राओं के साथ बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, अन्य सरकारी प्रतिभूतियां, सोने के भंडार, विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा राशि को भी शामिल किया जाता है। अधिकतर विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा भाग अमेरिका डॉलर के रूप में होता है।
कैसे काम करती है विदेशी मुद्रा
इसका प्रयोग देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ कई कार्यों में किया जाता है। जैसे जब भी डॉलर के मुकाबले किसी देश की मुद्रा कमजोर होने लगती है, तो वह देश अपनी मुद्रा को संभालने के लिए अपना विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करता है।
क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा भंडार ?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की मुद्रा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भंडार कम होने का अर्थव्यवस्था पर काफी प्रतिकूल असर होता है। इससे उस देश के लिए अपने आयात बिल का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही मुद्रा में भी अन्य मुद्राओं के मुकाबले तेज गिरावट आती है।
-एजेंसी
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