आगामी 18 जुलाई को देश में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और 21 जुलाई को देश को नया राष्ट्रपति मिल जायेगा। ऐसे में जहां एनडीए ने इस चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है तो वहीं विपक्षी दलों ने नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी कहे जाने वाले यशवंत सिन्हा को अपना प्रत्याशी बनाया है। फिलहाल संख्या बल के आधार पर देखें तो यशवंत सिन्हा के राष्ट्रपति बनने की उम्मीद कम है।
वहीं यशवंत सिन्हा की पत्नी नीलिमा सिंह ने कहा कि मेरे पति को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने से खुशी तो है लेकिन मुश्किल भी है। उन्होंने कहा कि मेरे पति साफ बोलने वाले लोगों में से हैं। उन्हें जो ठीक लगता है वहीं करते हैं। उनका कैरेक्टर मजबूत है।
नीलिमा सिन्हा ने कहा कि यशवंत सिन्हा के पास उनका आत्मविश्वास है। वो गलत कामों को वो बर्दाश्त नहीं करते हैं इसलिए वो कभी-कभी अधिक बोल जाते हैं, ज्यादा अस्पष्ट बोल जाते हैं। वहीं यशवंत सिन्हा के राष्ट्रपति चुनाव जीतने की उम्मीद पर नीलिमा सिंह ने कहा कि जीतने की उम्मीद तो कोई खास नहीं है क्योंकि बहुमत भाजपा के पास है और उम्मीदवार भी उन्होंने अच्छा चुना है। ऐसे में कोई खास उम्मीद तो नहीं है लेकिन फिर देखते हैं क्या होता है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की आदिवासी महिला के तौर पर प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू को कई अन्य दलों का भी समर्थन मिल रहा है। इसमें बीजेडी शामिल है। बता दें कि मुर्मू को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद बीजद अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को राज्य विधानसभा के सभी सदस्यों से आगामी राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने द्रोपदी मुर्मू को राज्य की बेटी बताया।
बता दें कि पटनायक वर्तमान में इटली के दौरे पर हैं। ऐसे में उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, “ओडिशा विधानसभा के सभी सदस्यों से, पार्टी लाइनों से अलग जाकर ओडिशा की बेटी द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च कार्यालय में चुनने के लिए सर्वसम्मति से समर्थन देने की अपील है।”
इसके अलावा एनडीए उम्मीदवार को जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) का भी समर्थन मिला है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनको समर्थन देने की घोषणा कर दी है।
वोट का गणित: भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए के पास 48 प्रतिशत वोट (10.86 लाख वोटों में 5.26 लाख) हैं। ऐसे में एनडीए के प्रत्याशी को जीतने के लिए किसी दल के समर्थन की जरुरत थी जिसमें बीजेडी ने साफ कर दिया है कि वो राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू को समर्थन देगी। जदयू के साथ रिश्तों में आई खटास के बाद भी नीतीश कुमार एनडीए प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया है। ऐसे में एनडीए के उम्मीदवार का जीतना लगभग तय माना जा रहा है।
वहीं कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए के पास लगभग 2 लाख 59 हजार 800 वोट हैं। जिसमें कांग्रेस के पास सबसे अधिक लगभग 1,45,000 मत हैं। संख्या बल में एनडीए काफी आगे है।
गौरतलब है कि भाजपा ने 2017 में अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के लिए 7,02,044 वोट हासिल किए। लेकिन वर्तमान में एनडीए के पास कुल 5.26 लाख हैं। निर्वाचक मंडल में लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाएं शामिल हैं और भाजपा के पास केवल निचले सदन में बहुमत है।
-एजेंसियां
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