वीर गोकुला जाट के बलिदान दिवस पर आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की घोषणा, सुनारी चौराहे पर लगाई जाएगी भव्य प्रतिमा

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धर्म, स्वाभिमान और शहादत की ज्वाला: आगरा की धरती पर वीर गोकुला सिंह जाट का 356वां बलिदान दिवस बना राष्ट्रचेतना का महासंगम

356 साल बाद भी ज़िंदा है विद्रोह की आग: वीर गोकुल जाट का बलिदान दिवस आगरा में श्रद्धा से मनाया गया

धर्म बदलने से इनकार और शहादत का चुनाव: क्यों वीर गोकुल जाट आज भी प्रासंगिक हैं

औरंगजेब को खुली चुनौती देने वाला पहला योद्धा: वीर गोकुल जाट की शहादत की अमर कहानी

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आगरा। गांव सुनारी चौराहे पर हिंदू धर्म रक्षक, अमर शहीद वीर गोकुला सिंह जाट के 356वें बलिदान दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्रामीणों सहित समाज के गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वातावरण राष्ट्रभक्ति और त्याग की भावना से ओतप्रोत रहा।

श्रद्धांजलि और संकल्प का क्षण

कार्यक्रम में वीर गोकुला सिंह जाट के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनसमूह ने धर्म और राष्ट्र रक्षा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने उनके जीवन को साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

औरंगजेब के विरुद्ध प्रथम सशस्त्र विद्रोह

पूर्व कमांडो और शिक्षक डॉक्टर योगेंद्र सिंह चाहर के अनुसार, वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1669 में वीर गोकुला सिंह जाट ने मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचारों के विरुद्ध प्रथम संगठित सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया। सिहोरा के निकट हुए युद्ध में मथुरा के फौजदार अब्दुल-उल-नवी को पराजित कर मार गिराया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित महानुभाव

गिरफ्तारी से शहादत तक की अमर गाथा

नवंबर 1669 में उन्हें उनके चाचा उदय सिंह के साथ गिरफ्तार कर आगरा लाया गया। 1 जनवरी 1670 को औरंगजेब ने इस्लाम स्वीकार करने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। आगरा कोतवाली के सामने अमानवीय यातनाएं देकर उन्हें शहीद कर दिया गया। जनश्रुति है कि उस स्थान को आज भी ‘फुव्वारा’ कहा जाता है।

महापौर की ऐतिहासिक घोषणा

मुख्य अतिथि आगरा की महापौर श्रीमती हेमलता दिवाकर ने घोषणा की कि गांव सुनहरी चौराहे पर वीर गोकुला सिंह जाट की भव्य प्रतिमा आगामी मार्च माह तक स्थापित की जाएगी।

गणमान्य जनों की सहभागिता

सभा को श्री यादराम वर्मा, बच्चू सिंह इंदौलिया, उदयवीर सिंह, अतर सिंह (मुखिया), अजीत चाहर (प्रधान), रविंद्र चौधरी (मंडल अध्यक्ष), वीरपाल चाहर, कीर्ति प्रधान, धर्मवीर सिंह (एडवोकेट), किसन सिंह, प्रेम सिंह वर्मा, प्रेम सिंह सोलंकी, सीताराम चौधरी, अशोक ठेनुआ, चंद्रवीर, डॉ सुरेंद्र सिंह, पार्षद प्रवीना राजावत, अजय राजावत एवं शिवराम सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।

कार्यक्रम के पश्चात ग्रुप फोटो तो बनता है।

अनुशासित समापन

कार्यक्रम का संचालन बाबूलाल छोंकर द्वारा किया गया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ और अंत में देश, समाज व गांव की समृद्धि की कामना की गई।

वीर गोकुल जाट का इतिहास

वीर गोकुला सिंह जाट हिंदू धर्म और भारतीय स्वाभिमान के अमर प्रतीक थे। उनके जीवन और संघर्ष का प्रामाणिक विवरण डॉ. भानु प्रताप सिंह की पुस्तक “हिंदू धर्म रक्षक वीर गोकुल जाट” में मिलता है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

संपादकीय

वीर गोकुला सिंह जाट का बलिदान हमें याद दिलाता है कि धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की रक्षा का संकल्प है। आज के समय में ऐसे महापुरुषों का स्मरण राष्ट्र की चेतना को जागृत करता है। इतिहास को भुलाना भविष्य से विश्वासघात है, और वीर गोकुल जाट जैसे योद्धा हमें झुकना नहीं, बल्कि अडिग रहना सिखाते हैं।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh