Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। वाणिज्यकर आयुक्त उत्तर प्रदेश के एक आदेश को लेकर व्यापारियों में बेचैनी है। आयुक्त वाणिज्य कर उत्तर प्रदेश द्वारा 10 सितंबर को जारी एक परिपत्र के अनुसार स्थानीय सचल दल व्यापारियों की जांच करने के उपरांत तलाशी अभियान चलाएगा। व्यापारी इसके विरोध में हैं। ऐसे में उन व्यापारी नेताओं की मुश्किलें बढ गई हैं जो लम्बे समय से भाजपा में सक्रिय रहे हैं। यह सच है कि जनपद में सक्रिय अधिकांश व्यापारी संगठनों में वह लोग पदाधिकारी हैं जो भारतीय जनता पार्टी से भी लम्बे समय से जुडे हैं। ऐसे में इन व्यापारी संगठनों के नेताओं के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। कई व्यापारी नेता जनबूझ कर सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं। व्यापारियों की मंशा को देखते हुए इस आदेश का विरोध भी करना है और सरकार के विरोध में भी नहीं जाना है। ऐसे में व्यापारी नेताओं ने बीच का रास्ता निकाला है।
मुख्यमंत्री के आदेशों के विरूद्ध जाकर अधिकारी आदेश पारित कर रहे हैं
इस आदेश का विरोध करते हुए भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने आयुक्त वाणिज्य कर उत्तर प्रदेश द्वारा 10 सितंबर को जारी एक परिपत्र के को सरकार के खिलाफ अधिकारियों की चाल करार दिया है। व्यापारियों के साथ वाणिज्यकर के ज्वांइंट कमिश्नर को इस आदेश के विरोध में ज्ञापन देने पहुंचे अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष मुरारी अग्रवाल ने कहाकि व्यापार मंडल का जन्म ही इस लिए हुआ था कि 20 से 25 साल पहले की सरकारें व्यापारियों के यहां सर्वे छापे करवाती थीं। हमारा पूरा डाटा मौजूद है। लोग सडक पर आने से डर रहे हैं। लोग बाहर निकलने से डर रहे हैं ऐसी स्थिति में सर्वेछापे के आदेश जारी करने का औचित्य क्या है। मुख्यमंत्री के आदेशों के विरूद्ध जाकर अधिकारी आदेश पारित कर रहे हैं। इस तरह के छापे और सर्वे पर पिछले बीस साल से रोक है
खुद को उत्तर प्रदेश का सबसे संगठित व्यापारिक संगठन बताने वाले फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल (फैम ) ने इस परिपत्र को एक काला अध्याय की संज्ञा दी है। संगठन का कहना है कि इस आदेश पत्र को जारी करने वाले अधिकारी किस मानसिक दौर से गुजर रहे हैं, तथा उनका व्यापारियों के प्रति कैसा नकारात्मक रवैया है। अगर किसी व्यापारी की किसी वर्ष बिक्री एकदम गिर गई है, अथवा एकदम बढ़ गई है तो ऐसे व्यापारियों की जांच कर उनकी तलाशी ली जाएगी। फेडरेशन ऑफआल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) ऐसे किसी भी निर्णय और कार्यवाही का पुरजोर विरोध करता है, अगर सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगती है, तो प्रदेश का व्यापारी सड़क पर उतरकर इसका विरोध करने को तैयार है। सरकारों की गलतियों को व्यापारी कब तक ढोएगा ? 2016 में केंद्र ने नोटबंदी की थी उससे व्यापारी सम्भल भी नहीं पाया था। कि 2017 में जीएसटी को लागू कर उसका व्यापार उलझा दिया गया।
आज जब केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार राष्ट्र के व्यापार को पुनः पटरी पर लाने के भरसक प्रयास कर रही है तो ऐसा में राज्य वाणिज्य कर अधिकारियो द्वारा जारी परिपत्र यह दर्शाता है किं राज्य का वाणिज्य कर विभाग सरकारों के सभी सकारात्मक कदमो को शून्य करना चाहता है। सरकार एक तरफ इंस्पेक्टर राज को समाप्त करना चाहती है दूसरी ओर अधिकारी वर्ग व्यापारी तलाशी का अधिकार इंस्पेक्टरों के हाथो में सौप रहा है।
मुख्यमंत्री उद्योग व्यापार विकसित करने की बात कर रहे है और नौकरशाही सर्वेछापे की बात कर रही है
अलिख भारतीय उद्योग व्यापार मंडल प्रदेश उपाध्यक्ष मुरारी अग्रवाल कहते हैं कि मुख्यमंत्री उद्योग व्यापार विकसित करने की बात कर रहे है और नौकरशाही सर्वेछापे की बात कर रही है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हम उद्योग व्यापार को बढावा देंगे। वह कहते हैं जितना उद्योग और व्यापार विकसित होगा उतना ही उत्तर प्रदेश विकसित होगा। वहीं उत्तर प्रदेश की बेलगाम नौकरशाही मुख्यमंत्री के आदेशों के विरूद्ध जाकर ऐसे आदेश कर रही ही जिससे लोगों को आक्रोश फैले। कोरोना संकट में भी वाणिज्यकर अधिकारी इस तरह के आदेश जारी करें तो आपस मझ सकते हैं।
राजस्व की बढ़ोतरी की चिंता सरकार के अधिकारियों के साथ ही व्यापारियों को भी है
फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल, मथुरा के जिला अध्यक्ष अजय कुमार अग्रवालने कहा कि परिपत्र एक काला अध्याय है। समझा जा सकता है इस आदेश पत्र को जारी करने वाले अधिकारी किस मानसिक दौर से गुजर रहे हैं, तथा उनका व्यापारियों के प्रति कैसा नकारात्मक रवैया है। राजस्व की बढ़ोतरी की चिंता सरकार के अधिकारियों के साथ ही व्यापारियों को है। परन्तु जो एक भय का माहौल इकट्ठा करने के उद्देश्य से इस कठिन महामारी के दौर में प्रदेश के वाणिज्य कर अधिकारी बनाना चाहते है, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
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