मैक्स के डॉ. हरित चतुर्वेदी और डॉ. शुभम जैन ने ऑनलाइन किया जागरूक
मोटापा, व्यायाम न करना और देरी से पहचान के कारण बढ़ रही समस्या
Agra, Uttar Pradesh, India. आगरा विकास मंच ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। प्रथम चरण में चिकित्सकों और आम जनता के साथ कैंसर के बारे में ऑनलाइन चर्चा कराई। मैक्स इंस्टीट्यूट कैंसर केयर के चेयरमैन डॉ. हरित चतुर्वेदी और कैंसर सर्जन डॉ. शुभम जैन ने कैंसर से संबंधित शंकाओं का निवारण किया। कैंसर के कारण बताए। यह भी बताया कि कैंसर न हो, इसके लिए क्या करें और कैंसर हो जाए तो कैसे पहचान करें।
कैंसर से डरने की जरूरत नहीं
डॉ. हरित चतुर्वेदी ने बताया कि शराब-तम्बाकू का सेवन, मोटापा और व्यायाम न करने से कैंसर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। कैंसर की लड़ाई देरी से पहचान के कारण हारते हैं। कृपया तम्बाकू का सेवन न करें। कोई भी लक्षण जैसे गांठ या मुंह में छाला, शौच में रक्त, कब्ज, दस्त तीन सप्ताह से अधिक रह जाता है तो कैंसर की जांच करवा लें। सर्जरी, कीमोथेरेपी, मॉलीक्लूयरथेरेपी से कंट्रोल हो सकता है। कैंसर के प्रति डर है, जो लड़ाई शुरू होने से पहले ही खा जाता है। कैंसर से डरने की जरूरत नहीं है।
सही जानकरी न होने से कैंसर समस्या बढ़ रही
डॉ. शुभम जैन ने बताया कि वर्ष 2014 की एक रिपोर्ट के अनुसार कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं और आगे भी बढ़ेंगे। कम पढ़े-लिखों में कैंसर की समस्या अधिक है। मुंह और फेंफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण तम्बाकू है। कैंसर से 30-32 आयु में सर्वाधिक मौतें हो रही हैं। कैंसर की जितनी जल्दी पहचान हो जाएगी, उतना ही बचाव है। आंत के कैंसर की जल्दी पहचान कर लें तो 10 में से 9 मरीज ठीक हो सकते हैं। बाद में एक मरीज ठीक हो पाता है। जागरूकता न होने से कैंसर की पहचान देर से हो पाती है। इलाज के खर्चे के डर से बीमारी को बताने से हिचकिचाते हैं। कैंसर के बारे में सही जानकरी न होने से भी समस्या है। कैंसर में रोबोटिक सर्जरी से फायदा अधिक है और इलाज का खर्चा कम होता है। उन्होंने कहा कि कोविड और कैंसर का कोई सीधा संबंध नहीं है। हां, कोविड के कारण हुए सीटी स्कैन के कारण फेंफड़ों के कैंसर का पता चल गया। डॉ. शोभा दयाल ने बताया कि मुंह के छाला का फोटो देखकर कैंसर की पहचान हो गई। मरीज स्वस्थ है।
निःशुल्क कैंसर जांच शिविर 28 को
आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने बताया कि 28 जुलाई को नवदीप ह़ॉस्पिटल, साकेत, शाहगंज, आगरा में अपराह्न एक से तीन बजे तक निःशुल्क कैंसर शिविर लगाया जाएगा। इसमें मरीजों को जागरूक किया जाएगा। निःशुल्क जांच होगी। शिविर में परामर्श के लिए पहले डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. बीके अग्रवाल, डॉ. रमेश धमीजा, डॉ. विजय कत्याल या डॉ. अरुण जैन के यहां 27 जुलाई तक पंजीकरण करा लें। मंच के संयोजक सुनील कुमार जैन ने बताया कि एसएस मेडिकल कॉलेज की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सुरभि मित्तल ने आश्वासन दिया है कि मंच द्वारा संदर्भित मरीजों की देखभाल में पूर्ण सहयोग किया जाएगा।
सवालों के जवाब में बताई ये बातें
डॉ. हरित चतुर्वेदी और डॉ. शुभम जैन ने शंकाओं का समाधान भी किया। बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम, सिगार सब कैंसर फैला रहे हैं। शराब का एक पैग लाभकारी है, ऐसी स्टडी हुई है लेकिन शराब से कैंसर होता है। आय़ुर्वेद, होम्योपैथ, यूनानी, सिद्धा आदि से कैंसर के इलाज के बारे में कहा कि हम जानकार नहीं हैं, लेकिन एलोपैथी मे अधिक काम हुआ है। पश्चिमी देश में बड़ी आंत का कैंसर मुख्यतः मांस भक्षण और खाने में फाइबर का प्रयोग न करने से होता है। क्या सभी प्रकार की गांठें कैंसर नहीं होती हैं लेकिन इस बारे में चिकित्सक ही बता सकता है। सभी कैंसर जेनेटिक नहीं होते हैं। 10 में से एक या दो ही होता है। ठीक होने के बाद दोबारा कैंसर हो सकता है, इसलिए हम हर मरीज को इलाज खत्म होने के बाद हर तीन माह बुलाते हैं ताकि बीमारी जल्दी पकड़ में आ सके। अगर कोई व्यक्ति तम्बाकू और शराब छोड़ना चाहता है तो उसकी दवाइयां और प्रक्रिया है। मोटे मरीज का इलाज करने में कई चुनौतियां होती हैं। कीमोथेरेपी के बारे में कई भ्रम हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। मैक्स हॉस्पिटल में कैंसर मरीज की काउंसलिंग भी कराई जाती है।

इन्होंने पूछे सवाल
डॉ. सुनील शर्मा सर्जन, डॉ. बीके अग्रवाल फिजीशियन, डॉ. अरुण जैन पीडियोट्रिक्स, राजकुमार जैन, मंच के महामंत्री सुशील जैन, डॉ. भानु प्रताप सिंह। मंच के प्रवक्ता संदेश जैन, विमल बोरा, आबिद, विशाल कुमार, जीशान खान, प्रकाश गुप्ता राजकुमार गिरि, संजीव कुमार सिंह, विनीत सुजांती, आहिल, सालंकरा देव की उपस्थिति उल्लेखीय रही।
कैंसर के सामान्य लक्षण
घाव अपने आप नहीं भर रहा है, खून रिस रहा है, रंग में परिवर्तन आ रहा है, छाला है।
खून का रिसाव कहीं से भी जैसे पेशाब और शौच के समय। माहवारी में अधिक रक्तस्राव।
शरीर में कोई भी गांठ जो धीरे-धीरे बढ़ रही है और दर्द भी नहीं हो रहा है।
भोजन निगलने में दिक्कत।
शौच और लघुशंका की आदत मे बदलाव।
मस्सा का बदलना।
खांसी और आवाज में बदलाव।
बिना किसी कारण के वजन कम होना।
बुखार आना जिसका कारण समझ में नहीं आ रहा है।
पेट दर्द जिसका कोई कारण न हो।
स्तन कैंसर के लक्षण
गांठ हो जाना और जरूरी नहीं है कि दर्द भी हो।
निपल में बदलाव आ रहा है। निपल से पानी या खून का स्राव हो रहा है
मैमोग्राफी से स्तन कैंसर की पहचान जल्दी हो जाती है। पश्चिमी देशों में 45 की आयु पर मैमोग्राफी जरूरी है।
स्तन छूकर स्वयं पहचान करें ताकि गांठ जल्दी पकड़ में आ सके।
युवावस्था में भी स्तन कैंसर हो सकता है।
पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है, लेकिन कम है।
शराब का सेवा करने से भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा है।
परिवार में ब्रेस्ट कैंसर न हो तो भी हो सकता है
किसी महिला के बच्चे न हों तो भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।
गर्भाशर कैंसर
नीचे से पानी का रिसाव, अधिक रक्तस्राव, अधिक लम्बे समय तक माहवारी तो कैंसर।
21 साल की आयु से पैप्समीयर टेस्ट, जो हर तीन साल बाद होना चाहिए।
गर्भाशय का रास्ता देखकर भी पता लगाया जाता है। इसकी वैक्सीन आ गई है जो 11-12 साल की आयु में लगा लेना चाहिए। 26 साल तक की महिलाएं भी लगवा सकती हैं। इसके बाद फायदा कम हो जाता है।
मुंह का कैंसर
उत्तर भारत में तम्बाकू, पान मसाला, गुटखा से मुँह का कैंसर अधिक
मुंह में फोड़ा, गांठ, खाना निगलने में दिक्क्त और गले में गांठ आम लक्षण हैं।
मुंह की स्वयं जांच कर सकते हैं।
धूम्रपान करने वालों में 7 फीसदी अधिक, शराब का सेवन करने वालों में भी अधिक।
धूम्रपान करने वालों के आसपास रहने वालों को भी कैंसर हो जाता है।
फेंफड़ा कैंसर
लम्बे समय से खांसी और कभी-कभी खून भी आता हो। खांसी को हल्के में न लें।
छाती का बार-बार संक्रमण, गर्दन में गांठ।
सीटी स्कैन से कैंसर की गांठ पकड़ में आ जाती है।
बड़ी आंत का कैंसर
शौच करने के रुटीन में बदलाव, कब्ज, दस्त, खून की कमी होना, लैट्रिन के साथ खून।
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