आगरा में डिप्टी सीएम के सामने फफक पड़ा थर्ड डिग्री का शिकार पीड़ित; केशव मौर्य बोले- कमिश्नरेट बनाकर क्या हाल कर दिया…

स्थानीय समाचार

आगरा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में कथित पुलिसिया अत्याचार और भ्रष्टाचार को लेकर शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के समक्ष सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आगरा में पुलिस बेलगाम हो चुकी है और निर्दोष लोगों पर खुलेआम थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी सीएम ने मौके पर मौजूद एडिशनल पुलिस कमिश्नर रामबदन सिंह पर कड़ी नाराजगी जताई और उत्पीड़न के मामलों में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।

सर्किट हाउस बैठक में फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा

डिप्टी सीएम के आगरा दौरे के दौरान फतेहाबाद में जन चौपाल के बाद सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस के खिलाफ एक स्वर में नाराजगी जताई गई। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पुलिस अत्याचार के मामलों में न केवल कार्रवाई नहीं हो रही, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं।

किरावली और जीवनी मंडी के मामले उठे प्रमुखता से

बैठक में किरावली निवासी राजू शर्मा का मामला सबसे पहले उठाया गया। आरोप लगाया गया कि उसे थाने में उल्टा लटकाकर बेरहमी से पीटा गया, थर्ड डिग्री दी गई और उसकी दोनों टांगें तोड़ दी गईं। पीड़ित के पैरों में फ्रैक्चर बताया गया है और परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

इसके बाद जीवनी मंडी चौकी क्षेत्र के नरेंद्र कुशवाहा का मामला सामने रखा गया। आरोप है कि उसे भी थर्ड डिग्री दी गई। नरेंद्र कुशवाहा अपने परिवार के साथ बैठक में उपस्थित हुए और उपमुख्यमंत्री को अपनी चोटें दिखाईं। जनप्रतिनिधियों ने पिछले दो महीनों में सामने आए ऐसे मामलों की सूची भी डिप्टी सीएम को सौंपी।

“कमिश्नरेट बनाकर क्या हाल कर दिया?”

इन आरोपों पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एडिशनल पुलिस कमिश्नर रामबदन सिंह को बुलाकर कड़े सवाल किए। उन्होंने कहा कि आईपीएस अधिकारियों की मांग पर आगरा को पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया था, लेकिन वर्तमान हालात बेहद चिंताजनक हैं। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां क्या हो रहा है, यह सरकार को स्वीकार्य नहीं है।

जेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठा

बैठक के दौरान जिला जेल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया गया। आरोप लगाया गया कि जेल के भीतर सुविधाओं के नाम पर अवैध वसूली हो रही है। इस पर भी डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताते हुए पूरे प्रकरण की जांच और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।

सरकार के रडार पर पुलिस कमिश्नरेट

बैठक के बाद संकेत स्पष्ट हैं कि आगरा पुलिस कमिश्नरेट की कार्यशैली अब सीधे सरकार के रडार पर है। जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद आने वाले दिनों में दोषी पुलिसकर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh