Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। वैश्विक महामारी कोविड-19 के फैलते संक्रमण को रोकने हेतु केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार ही पर्व व त्यौहारों को मनाने की विवशता के मध्य प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को आयोजित होने वाली रथयात्रा भी सीमित संख्या में श्रद्धालुओं व मन्दिर के पूजाचार्यों की उपस्थिति में मनाये जाने का निर्णय श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा लिया गया है।
पांच जून से एकांतवास
यह जानकारी श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान ने विज्ञप्ति जारी कर दी है। संस्थान की विज्ञप्ति में बताय गया है कि श्रीकृष्ण-जन्मस्थान स्थित भागवत-भवन में विराजमान भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र व बहिन सुभद्रा 5 जून से ही परंपरागत स्नान-यात्रा के उपरांत ज्वरग्रस्त होकर एकांतवास में हैं जो कि आगामी 23 जून को पूर्ण होगा, तत्पश्चात भगवान जगन्नाथ अपने ज्येष्ठ भ्राता व भगिनि के साथ परिसर में भ्रमण पर रथारूढ़ होकर निकलेंगे।
श्रीकृष्ण-जन्मस्थान के विशाल परिसर भ्रमण करेंगे
तय कार्यक्रम के अनुसार वर्तमान कोरोना की इस परिस्थिति में 23 जून को रथयात्रा के अवसर पर सांयकाल 6 बजे रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ परंपरागत नगर भ्रमण न कर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान के विशाल परिसर का ही अवलोकन करेंगे। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, प्रबन्ध-समिति के सदस्यगण डा.चन्द्रभान गुप्ता, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा.विनोद बनर्जी व सं.मुख्य अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव आदि ने भक्तगण से रथ पर सवार भगवान के दर्शनार्थ पधारने का आग्रह किया है।
सभी श्रद्धालुओं से मास्क लगाकर दर्शनार्थ आने की अपील
कोरोना को लेकर शासन की गाइडलाइन और कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है कि अब मंदिर परिसर में ही भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के कार्यक्रम होंगे। सभी श्रद्धालुओं से मास्क लगाकर दर्शनार्थ आने व आपस में नियत अंतराल बनाये रखने की अपील की गई है। विजय बहादुर सिंह, प्रवक्ता श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान
284 वर्ष में पहली बार होगा ऐसा
तीर्थनगरी वृंदावन में लगभग 284 वर्ष में पहली बार इस आयोजन पर ग्रहण लगा है। यमुना तट स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ सुसज्जित रथ पर विराजमान तो होंगे, लेकिन भक्तजन दर्शन लाभ से वंचित रहेंगे। महंत ज्ञानप्रकाश पुरी के अनुसार सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए तीन रथों में विराजमान भगवान के श्री विग्रह को मंदिर परिसर में ही विहार कराया जाएगा। भक्तों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सप्त देवालयों समेत अन्य कई मंदिरों में भी भगवान नगर यात्रा नहीं करेंगे।
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