आगरा: ताजनगरी में खाकी को दागदार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इरादत नगर थाने में तैनात एक दरोगा (SI) पर देश की रक्षा करने वाले कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक से 20 लाख रुपये की मोटी घूस मांगने का संगीन आरोप लगा है। भ्रष्टाचार की यह हद तब पार हो गई जब दरोगा ने सीधे डीसीपी (DCP) का नाम लेकर प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये का ‘रेट’ तय कर दिया। पूर्व सैनिक द्वारा बातचीत का वीडियो पुलिस कमिश्नर को सौंपे जाने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
’5 लाख दो और नाम हटवाओ’: दरोगा का वीडियो
शिकायतकर्ता नगेंद्र कुमार, जो कारगिल युद्ध लड़ चुके पूर्व सैनिक हैं, ने पुलिस कमिश्नर को जो वीडियो सौंपा है, वह रूह कंपा देने वाला है। वीडियो में एसआई मानवेंद्र गंगवार कथित तौर पर यह कहते सुनाई दे रहे हैं “अगर चारों के नाम निकलवाने हैं तो 20 लाख (5 लाख प्रति व्यक्ति) देने होंगे। डीसीपी साहब को बस रुपये चाहिए।” इतना ही नहीं, दरोगा अपनी रसूख का बखान करते हुए कहता है कि उसे 60 हजार में चौकी इंचार्ज बनाया जा रहा था, लेकिन शादी की वजह से उसने मना कर दिया।
जमीन कब्जे के मुकदमे में फंसाने की धमकी
मामला साल 2025 में दर्ज एक जमीन कब्जे की एफआईआर (FIR) से जुड़ा है। पूर्व सैनिक नगेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने 2021 में वैध तरीके से जमीन खरीदी थी, जिसका दाखिल-खारिज भी हो चुका है। बावजूद इसके, उनके और चार अन्य साथियों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसी केस की विवेचना कर रहे एसआई मानवेंद्र गंगवार ने नाम हटाने के बदले में वसूली का जाल बिछाया। आरोप है कि पैसे न देने पर जेल भेजने और एफआर (Final Report) न लगाने की धमकी दी जा रही थी।
हाईकोर्ट का स्टे भी नहीं आया काम
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित पक्ष ने इस मामले में पहले ही हाईकोर्ट से ‘स्टे ऑर्डर’ प्राप्त कर लिया था और सभी साक्ष्य विवेचक को सौंप दिए थे। इसके बावजूद, दरोगा ने कानून को ताक पर रखकर वसूली जारी रखी। पूर्व सैनिक ने आरोप लगाया कि दरोगा लगातार फोन कर और दफ्तर बुलाकर रुपयों के लिए दबाव बना रहा था, जिससे तंग आकर उन्हें स्टिंग ऑपरेशन (वीडियो रिकॉर्डिंग) करना पड़ा।
कमिश्नरेट में हड़कंप, विभागीय जांच के आदेश
वीडियो साक्ष्य के तौर पर सामने आते ही आगरा पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। DCP सिटी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि आरोपी एसआई मानवेंद्र गंगवार को निलंबित कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ACP शमशाबाद को जांच सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर दरोगा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
खाकी की साख पर बड़ा सवाल
देश की सीमाओं पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले कारगिल वीर को अपने ही देश के सिस्टम और पुलिस से न्याय पाने के लिए इस कदर जद्दोजहद करनी पड़ी, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर एक पूर्व सैनिक के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम आदमी की क्या बिसात?
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