नई दिल्ली/आगरा: संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को फतेहपुर सीकरी के सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने कृषि बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने केंद्रीय बजट 2025-26 को ‘गांव, गरीब और किसान’ को समर्पित बताते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने खेती को तकनीक और सम्मान से जोड़ा है।
चाहर ने कांग्रेस के 65 साल के शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग आज एमएसपी (MSP) पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में इसे कानूनी जामा पहनाने की कभी सुध नहीं ली।
फतेहपुर सीकरी को मिली वैश्विक पहचान: बनेगा अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र
सांसद चाहर ने सदन में गर्व के साथ घोषणा की कि उनके संसदीय क्षेत्र फतेहपुर सीकरी के गांव सींगना में ‘साउथ एशिया’ के लिए अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। उन्होंने इसे ब्रज क्षेत्र के किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से ‘आलू बोर्ड’ के गठन और कोल्ड स्टोरेज की बिजली दरों को घरेलू दरों के समान करने या सब्सिडी देने की पुरजोर मांग उठाई, ताकि आलू किसानों की लागत कम हो सके।
’अन्नदाता’ अब ‘ऊर्जादाता’ भी: कुसुम योजना से बदली तस्वीर
चाहर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसान अब केवल अनाज ही नहीं उगा रहा, बल्कि कुसुम योजना और सोलर प्लांट के जरिए बिजली भी पैदा कर रहा है। उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि ने छोटे किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को समय की मांग बताते हुए कहा कि रसायनों से धरती और स्वास्थ्य दोनों बचेंगे।
विपक्ष पर प्रहार: “कांग्रेस ने सिर्फ भ्रम फैलाया”
एमएसपी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए राजकुमार चाहर ने कहा, “कांग्रेस ने दशकों तक शासन किया, लेकिन किसानों के लिए कोई एक भी ठोस योजना लागू नहीं की। मोदी सरकार न केवल एमएसपी बढ़ा रही है, बल्कि खरीद की व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाया है।” उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को ‘किसान मसीहा’ बताते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने की बात कही।
दलहन आयात रोकने और भूमिहीन मजदूरों के लिए विशेष मांग
सांसद ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि भारत को हर साल करीब 42 हजार करोड़ रुपये का दलहन (दालें) आयात करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र में दलहन उत्पादन के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू की जाए। इसके अलावा, उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़े भूमिहीन मजदूरों की समस्याओं के अध्ययन के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष समिति बनाने का भी सुझाव दिया।
कृषि अनुसंधान में भारी निवेश
उन्होंने बजट के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए 9,980 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आज भारत दूध उत्पादन में नंबर वन और फल-सब्जियों में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जो मोदी सरकार की नीतियों का ही सुखद परिणाम है।
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