भारत में चिप क्रांति का सपना बड़ा दिखाया जा रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह महज भाषणों और दावों तक ही सीमित है? प्रधानमंत्री के घोषणाओं में जो स्वदेशी चिप, ‘विक्रम’ लॉन्च की गई, वह तकनीकी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उससे जुड़े बड़े सवाल और असफलताएं उजागर होती हैं, जिन्हें सरकार नजरअंदाज कर रही है।
बड़ी बातों के पीछे गहरी खामियां
सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन और बड़े निवेश की बातें तो खूब कीं, लेकिन भारत में इस क्षेत्र में विशेषज्ञों और कुशल इंजीनियरों की भारी कमी आज भी बड़ी बाधा बनी हुई है। देश में हर साल 15 लाख इंजीनियर पैदा होते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 3 प्रतिशत ही सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए उपयुक्त हैं। यह हालात बताते हैं कि इस क्रांति के लिए आवश्यक कौशल और विशेषज्ञता नहीं है।
साथ ही, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की कमी और कार्यान्वयन में देरी इस क्षेत्र के विकास के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में चिप पार्क बन रहे हैं, परंतु फैक्ट्री के लिए जरूरी तकनीकी उपकरण और सप्लाई चेन पर विदेशी निर्भरता अभी भी बना हुआ है। यह दर्शाता है कि भारत के चिप उद्योग में पूरी तरह आत्मनिर्भरता अभी दूर की कौड़ी है।
शिक्षा और कौशल विकास की दरिद्रता
नई शिक्षा नीति में बदलावों का दावा जरूर है, मगर असल में देश में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास की नीतियां इतनी कमजोर हैं कि युवा योग्य विशेषज्ञ बनने के बजाए अधूरे शिक्षित रह जाते हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जो प्रस्तावित अप्रोच है, उसमें एक बड़ी खामी यह है कि न तो औद्योगिक प्रशिक्षण ठीक से हो रहा है, न ही शोध और विकास में पर्याप्त निवेश।
राजनीतिक नाटक और असमंजस
सरकार की चिप क्रांति का जो प्रचार-प्रसारण हो रहा है, वह कहीं न कहीं एक बड़े राजनीतिक नाटक जैसा लगता है। तकनीकी उपलब्धियों की असल तस्वीर जनता के सामने नहीं लाई जा रही। विदेशी कंपनियों के नाम जो चमक-दमक से सरकार दिखाती है, वे असल में भारत के लिए बड़ी आर्थिक और तकनीकी चुनौती साबित हो सकती हैं, क्योंकि कितना नियंत्रण और लाभ वास्तव में भारत को मिलेगा, यह प्रश्न बना हुआ है।
भारत की चिप क्रांति की कथित सफलता के पीछे छुपे हैं बड़े संकट—कमजोर शिक्षा तंत्र, कौशल की कमी, अधूरी तकनीकी स्वायत्तता और राजनीतिक प्रेरित दावे। यदि सरकार इन मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज करती रही, तो यह क्रांति केवल एक दिखावटी कवच ही साबित होगी। देश को वास्तविकता समझकर सही दिशा में काम करने की जरूरत है, वरना यह सपना जल्दी ही खंडहर में बदल जाएगा।
-मोहम्मद शाहिद की कलम से
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