ताज प्रेस क्लब चुनाव में 41 पत्रकारों की इज्जत दांव पर, धुआंधार प्रचार, मतदान 18 अक्टूबर को
डॉ. भानु प्रताप सिंह
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
चुनावी जंग में कलमकार मैदान में
ताज प्रेस क्लब, आगरा का चुनाव इस बार पत्रकारिता की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। माहौल इतना गर्म है कि हर प्रत्याशी ने प्रचार का बिगुल फूंक दिया है। घर-घर जाकर मुलाकातें, मोबाइल से लगातार फोन कॉल, और यहां तक कि टेलीकॉलर तक नियुक्त किए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स – व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम – हर जगह प्रचार का शोर है। कुल 41 पत्रकारों की इज्जत अब इस चुनावी रणभूमि में दांव पर है।
अखबारों की प्रतिस्पर्धा बनी पहचान
इस चुनाव को मीडिया हाउसों की आपसी शक्ति-परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। दिलचस्प यह है कि दैनिक जागरण से इस बार कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं है। जबकि अध्यक्ष पद पर हिंदुस्तान और अमर उजाला आमने-सामने हैं।
मतदान 18 अक्टूबर 2025 को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। वोटिंग के तुरंत बाद मतगणना होगी और परिणाम उसी शाम घोषित कर दिए जाएंगे। पत्रकारों में उत्सुकता चरम पर है।
अध्यक्ष पद पर सीधा मुकाबला
अध्यक्ष पद की दौड़ में मनोज मिश्रा (हिंदुस्तान) और देश दीपक तिवारी (अमर उजाला) आमने-सामने हैं। चुनावी हलकों में चर्चा है कि यह मुकाबला लगभग एकतरफा माना जा रहा है। मनोज मिश्रा ने ताज प्रेस क्लब की छवि सुधारने में जो काम किए हैं, उसका लाभ उन्हें मिल सकता है। क्लब का मुख्य कक्ष अब देखने-लायक बन चुका है।
वहीं देश दीपक तिवारी भी अपने समर्थकों के साथ डटे हुए हैं और सम्मानजनक मुकाबले का दावा कर रहे हैं।
महासचिव पद पर त्रिकोणीय संघर्ष
महासचिव पद पर महेश धाकड़, विवेक जैन और प्रभजोत कौर के बीच कड़ा मुकाबला है। प्रभजोत कौर भले ही सक्रिय रूप से चुनाव मैदान में न हों, पर नाम मतपत्र में होने से उन्हें कुछ वोट स्वाभाविक रूप से मिल सकते हैं। प्रभजोत को दिन में कईबर फोन किया लेकिन रिसीव नहीं किया। विवेक जैन पिछली बार की हार का बदला इस बार जीत से चुकाना चाहते हैं, जबकि महेश धाकड़ शांत और योजनाबद्ध प्रचार में लगे हैं। समीकरण बराबर लगते हैं।
उपाध्यक्ष पद पर सात प्रत्याशी, पर जीतेंगे सिर्फ तीन
सात उम्मीदवारों के बीच यह पद एक मिनी युद्धभूमि बना हुआ है। पिछली कार्यकारिणी में महासचिव रहे के.पी. सिंह इस बार उपाध्यक्ष पद के लिए मैदान में हैं। उन पर लगे पुराने आरोप और अधूरे हिसाब अब जनता की अदालत – यानी पत्रकारों के वोट – में जांचे जाएंगे। यदि वे जीतते हैं तो यह माना जाएगा कि उनके खिलाफ सारे आरोप बेबुनियाद थे।
सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य भी दंगल में
तीन सचिव चुने जाने हैं और यहां पीयूष शर्मा पिछली बार महासचिव पद की दौड़ में रहे थे, अब सचिव पद से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
कोषाध्यक्ष पद के लिए चार प्रत्याशी मैदान में हैं – संजय सिंह, प्रदीप कुमार रावत, अमोल दीक्षित और धीरज शर्मा।
इसके अलावा 11 कार्यकारिणी सदस्य चुने जाने हैं, जिनमें 15 से अधिक चेहरे अपनी मौजूदगी दर्ज कराए हुए हैं। नामों की भीड़ में कई नए नाम उभर कर सामने आए हैं जो भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय कर सकते हैं।
पत्रकारों की दुविधा – सब अपने हैं!
पत्रकारों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि विरोध किसका करें? सभी प्रत्याशी उनके परिचित हैं। कुछ घनिष्ठ, कुछ मित्रवत। यही कारण है कि खुलकर समर्थन या विरोध बहुत कम लोग कर रहे हैं।
हर प्रत्याशी के फोन पर “आपको ही वोट देंगे” कहने वाले पत्रकार अंदर-ही-अंदर असमंजस में हैं।
विडंबना यह है कि जो समाज को सच बोलने का साहस सिखाते हैं, वही अपने वोट को लेकर सच बोलने में झिझक रहे हैं।
उम्मीदवार सूची एक नजर में
अध्यक्ष पद: मनोज मिश्रा, देश दीपक तिवारी
उपाध्यक्ष पद: अजेन्द्र सिंह चौहान (अज्जू), हरिकान्त शर्मा, सज्जन सागर, लक्ष्मण शर्मा, आदर्श नन्दन गुप्ता, के.पी. सिंह, मनोज गोयल
महासचिव पद: महेश धाकड़, विवेक जैन, प्रभजोत कौर
सचिव पद: अनिल राणा, वरिन्द्र चौधरी, राजकुमार मीना, अज़हर उमरी, मुनीन्द्र शंकर त्रिवेदी, लाखन सिंह बघेल, आलोक द्विवेदी, पीयूष शर्मा
कोषाध्यक्ष पद: संजय सिंह, प्रदीप कुमार रावत, अमोल दीक्षित, धीरज शर्मा
कार्यकारिणी सदस्य: सुरेन्द्र प्रताप सिंह (एस.पी. सिंह), विकास मित्तल, पंकज जैन, राजेश कुमार शर्मा, मनीष जैन, दिलीप कुमार सुराना, शीतल सिंह, वीरेन्द्र इमल, जयसिंह वर्मा, जगत नारायण शर्मा, जितिन श्रीवास्तव, अरुण रावत, शरद शर्मा, मुकेश वर्मा, राशिद, फरहान खान।
संपादकीय दृष्टिकोण: यह चुनाव पत्रकारिता की आत्मा का इम्तिहान है
ताज प्रेस क्लब का यह चुनाव केवल पदों की होड़ नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा का इम्तिहान है।
यह वही वर्ग है जो रोजाना नेताओं से नैतिकता की उम्मीद करता है — आज वही वर्ग खुद पारदर्शिता की परीक्षा दे रहा है।
यह आवश्यक है कि विजेता केवल वोटों से नहीं, बल्कि विश्वास, मर्यादा और पत्रकार धर्म से विजेता बने।
ताज प्रेस क्लब, ताज के शहर की पहचान है — अगर यहां की पत्रकारिता निष्पक्ष और मजबूत रहेगी तो पूरा प्रदेश उसकी छाया में खड़ा रहेगा।
18 अक्टूबर को सिर्फ मत नहीं पड़ेंगे — वह दिन होगा जब आगरा की पत्रकारिता तय करेगी कि उसकी दिशा ‘व्यक्ति’ तय करेगा या ‘विचार’।
— डॉ. भानु प्रताप सिंह
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