भारत सरकार के 2025-26 के बजट में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की गई है। आयकर स्लैब को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने का निर्णय करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है। नए कर ढांचे के तहत, 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई आयकर देय नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त, स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि को ₹75,000 कर दिया गया है, जिससे कुल 12,75,000 रुपये तक की आय कर-मुक्त होगी। यानी, लगभग एक लाख रुपये मासिक आय वाले व्यक्तियों को कोई आयकर नहीं देना होगा। यह करदाताओं के लिए एक उत्कृष्ट कर नियोजन योजना है।
वरिष्ठ नागरिकों को विशेष लाभ
वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सरकार ने एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। धारा 194A के तहत टीडीएस की सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले ब्याज पर कम कर देना होगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और अधिक सशक्त होगी।
इसके अतिरिक्त, आयकर सरलीकरण की दिशा में सरकार अगले सप्ताह एक नया आयकर अधिनियम विधेयक पेश करने जा रही है, जिससे कर संबंधी कई जटिल नियमों में सुधार किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह बजट मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और करदाताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
— वी. के. गोयल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, बैंक अधिकारी संगठन
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