मुंबई। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच महाराष्ट्र का गड़चिरोली जिला एक मिसाल बनने की राह पर है। पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण की एक बड़ी पहल के तहत, सूरजगढ़ इस्पात प्राइवेट लिमिटेड और MIAM चैरिटेबल ट्रस्ट ने ‘ग्रीन गड़चिरोली मिशन’ के अंतर्गत 5 लाख पौधे महाराष्ट्र सरकार को सौंपे हैं। यह पहल न केवल जिले के हरित आवरण को बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया जरिया भी बनेगी।
प्रकृति और रोजगार का अनूठा संगम
MIAM चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक और सूरजगढ़ इस्पात की डायरेक्टर नीता जोशी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के समक्ष इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रस्तुत किया। इस अभियान को महज वृक्षारोपण से जोड़कर न देखते हुए एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक मिशन के रूप में देखा जा रहा है।
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत इसका समावेशी मॉडल है:
स्थानीय भागीदारी: 200 से अधिक महिलाएं सीधे तौर पर पौधों के उत्पादन और रोपण प्रक्रिया से जुड़ी हैं।
आदिवासी सशक्तिकरण: सैकड़ों आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका के नए और टिकाऊ अवसर पैदा हुए हैं।
जैव विविधता का संरक्षण: 5 लाख पौधे न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेंगे, बल्कि गड़चिरोली की समृद्ध जैव विविधता को भी नई मजबूती प्रदान करेंगे।
टिकाऊ भविष्य की नींव
पर्यावरणविदों का मानना है कि गड़चिरोली जैसा जिला, जो अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है, वहाँ इस तरह का मिशन जलवायु संतुलन बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना ‘हरित विकास’ का एक ऐसा मॉडल है जहाँ पर्यावरण का संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास साथ-साथ चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री के समक्ष इस प्रस्तुति ने इस पहल को राज्य स्तर पर एक नई पहचान दी है, जिससे गड़चिरोली के भविष्य को एक हरा-भरा और आत्मनिर्भर आयाम मिलने की उम्मीद जगी है।
-अनिल बेदाग
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