डॉ. भानु प्रताप सिंह और डॉ. देवी सिंह नरवार ने इसे ऐतिहासिक घटना बताया
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-48 में संशोधन के लिए चलाया जा रहा अभियान
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आगरा। ‘‘हिन्दी से न्याय’’ के केन्द्रीय अधिष्ठाता मण्डल के वरिष्ठ सदस्य एवं प्रबन्धन विषय में हिन्दी भाषा में शोध प्रबन्ध पर पीएच0डी0 की उपाधि धारक पहले भारतीय डॉ. भानु प्रताप सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) तथा ‘‘हिन्दी से न्याय’’ की उत्तर प्रदेश संचालन समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने इस बात पर खुशी जाहिर की है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ पीठ के फैसले व आदेश अब हिन्दी में उपलब्ध होना शुरू हो गये हैं। न्यायालय के फैसले हिन्दी में हों, इसके लिए लम्बे समय से संघर्ष किया जा रहा है। यह हिन्दी से न्याय अभियान का असर है। बता दें कि यह अभियान चन्द्र शेखर उपाध्याय के नेतृत्व मे चलाया जा रहा है। उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में हिन्दी में फैसले कराकर कीर्तिमान स्थापित किया है।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह तथा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने संयुक्त बयान जारी कर बताया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-48 में संशोधन की माँग ‘‘हिन्दी से न्याय’’ संगठन द्वारा पिछले 30 वर्षों से की जा रही है। ज्ञात हो भारतीय संविधान के अनुच्छेद-48 में यह प्रावधान है कि सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 उच्च न्यायालयों में केवल और केवल अंग्रेजी में ही याचिका दाखिल होंगी, अंग्रेजी में ही फैसले होंगे और अंग्रेजी में बहस होगी। भारतीय परिवेश में धारा-48 ठीक नहीं है, उसमें संशोधन की आवश्यकता है और ‘‘हिन्दी से न्याय’’ से जुड़े लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में हिन्दी भाषा और अन्य भारतीय भाषाओं में कामकाज हो, इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है। उ0प्र0 में 2 लाख हस्ताक्षर कराये जाने का लक्ष्य था, जिसमें आगरा जनपद से करीब 20 हजार हस्ताक्षर कराये जा चुके हैं। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में हिन्दी और क्षेत्रीय जनमानस की भाषा में कार्य होने से सभी को लाभ मिलेगा विशेष तौर से उस वर्ग को जो अंग्रेजी नहीं जानता है।
उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय व लखनऊ पीठ के फैसले व आदेश हिन्दी में उप्लब्ध होना शुरू हो गए हैं। लखनऊ पीछ के न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल ने 69 हजार शिक्षक भर्ती के हिन्दी में अनुवादित निर्णय को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महानिबंधक ने एक वक्तव्य में कहा कि न्यायालय के फैसले हिन्दी में प्रकाशन से जनमानस तथा विभिन्न विभागों को निर्णय समझाने और क्रियान्वित करने में सरलता एवं सुविधा होगी। केंद्र सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहल की गई कि उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्णयों की प्रति सभी क्षेत्रीय भाषाओं में भी आम जनमानस एवं संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाय।
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