Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा, गोवर्धन। ब्रज साहित्य परिषद न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष, लोकतंत्र सेनानी एवं ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि, वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार देवकी नंदन कुम्हेरिया (88) अब नहीं रहे। उन्होंने मंगलवार की सुबह बड़ा बाजार में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। कुम्हेरिया ने जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का विरोध किया था।
राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर
इनके साथ गोवर्धन में पांच सदस्यीय टीम ने सत्याग्रह कर गोवर्धन थाने पर जोरदार प्रदर्शन भी किया था। वे इमरजेंसी में जेल गये थे। उनके निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया। एसडीएम राहुल यादव, सीओ जितेन्द्र कुमार ने पुष्प अर्पित किये। अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस के जवानों ने राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
अंतिम यात्रा में भारत माता की जय और अमर शहीदों की जय-जयकार गूंजती रही। उनको ज्येष्ठ पुत्र कृष्ण कांत कुम्हेरिया ने मुखाग्नि दी। इस अवसर पर चेयरमैन खेमचंद शर्मा, जितेन्द्र सिंह तरकर, कपिल सेठ, ज्ञानेन्द्र सिंह राणा, ओमप्रकाश शर्मा, मनोज पाठक, परशुराम सिंह, सियाराम शर्मा, केशव मुखिया आदि थे।
उन्हें ब्रजभाषा साहित्य के क्षेत्र में मिले कई सम्म्मान
गोवर्धन निवासी कुम्हेरिया को ब्रजभाषा काव्य रचना में हास्य-व्यंग्य के स्थापित रचनाकार थे। ब्रज रस माधुरी, पत्नी-पुराण, गिर्राज-वंदना तथा हम फागुन में ससुरार गए जैसी एक दर्जन से अधिक कृतियों से मां सरस्वती के भंडार में निरन्तर योगदान देने वाले कुम्हेरिया लगभग 60 वर्षों से कवि-सम्मेलनों के मंच पर सक्रिय रहे।
उनकी प्रमुख ब्रजभाषा की कविताएं ‘कीन्हो देस बिगार तिहारी ऐसी तेसी, करि दियौ पनिया ढार, तिहारी ऐसी तेसी’…
‘‘मथनी में मथी मिसरी में पगी, ब्रजभाषा हमै तो प्यारी लगै’’-देवकी नंदन कुम्हेरिया
प्रारंभ में कई समाचार पत्रों के लिए गोवर्धन से समाचार प्रेषण का कार्य भी किया। साहित्यिक सेवाओं के लिए कुम्हेरिया जी को साहित्य-मण्डल श्रीनाथद्वारा द्वारा ब्रजभाषा-विभूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें श्री पीतलिया-स्मृति सम्मान तथा सूर श्याम सेवा मण्डल द्वारा महाकवि सूर सम्मान जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी समय-समय पर मिले।
आपातकाल में 19 माह की जेल काटी
प्रारंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। कुम्हेरिया ने आपातकाल तथा मीसा का जोरदार विरोध किया था। जिसके कारण उन्हें 19 माह की जेल भी काटनी पड़ी थी। बाद में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा इसके लिए उन्हें लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित किया गया था।
वरिष्ठ ब्रजभाषा साहित्य सिरजक गोवर्धन निवासी देवकीनन्दन कुम्हेरिया ने एक बार कहा था कि ‘‘आज साहित्य अर्थ से जुड़ा है, धर्म से नहीं, साहित्य मानव धर्म सिखाता है, प्रेम और भाईचारे को महत्व देता है’’।
ब्रजभाषा साहित्य की अपूर्णनीय क्षति
उनके निधन पर पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, राम निवास शर्मा अधीर, अशोक अज्ञ, राधा गोविंद पाठक, डॉ. नटवर नागर, उपेन्द्र त्रिपाठी, श्रीकृष्ण शरद, डॉ. अनिल गहलोत, संतोष कुमार सिंह तीर्थ पुरोहित महासंघ के महामंत्री अमित भारद्वाज आदि साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ब्रजभाषा साहित्य की अपूर्णनीय क्षति बताया है।
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