Mathura (Uttar Pradesh, India)। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ की याचिका पर बुधवार को मथुरा की अदालत में दोपरहर बाद सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों ने बहस की। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाने के लिए शाम का समय दिया। फिर शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद अदालत ने याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया।
क्या है मामला
13.37 एकड़ जमीन पर 1973 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के बीच हुए समझौते और उसके बाद की गई न्यायिक निर्णय (डिक्री) को रद्द करने संबंधी याचिका डाली गई थी। 25 सितंबर, 2020 को ‘भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि कटरा केशवदेव पर हक के लिए अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मनि त्रिपाठी, करुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह और त्रिपुरारी तिवारी के माध्यम से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में याचिका प्रस्तुत की थी।
शाही ईदगाह के कब्जे में 13.73 एकड़ भूमि का मामला
उन्होंने अधिवक्ता हरीशंकर जैन, विष्णु शंकर और पंकज शर्मा के माध्यम से अदालत से 13.73 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के बीच 1973 से पूर्व के समझौते और 1973 में हुई डिक्री रद्द करने की मांग की थी।
मुस्लिम भाई बड़ा दिल दिखाएं- नवल गिरि महाराज
इस संबंध में काशी विद्वत परिषद के पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी नागेंद्र महाराज के यहां एक बैठक हुई। इसमें महामंडलेशर व धर्मगुरुओं ने भाग लिया और सभी ने एक मत से सामाजिक सहमति व राम जन्मभूमि आंदोलन को आधार मानते हुए मामले का पटाक्षेप करने और इस मामले को राजनीतिक मुद्दा न बनाने की मांग की। नागेंद्र महाराज ने कहा कि अयोध्या तो झांकी थी मथुरा-काशी बाकी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में बहुत बड़ा विवाद था, लेकिन मथुरा और काशी में कोई बड़ा विवाद नहीं है। जिस तरह से अयोध्या में न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, उसी आधार पर सहमति बन जानी चाहिए। महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज ने तो साफ कहा कि मुस्लिम भाइयों को बड़ा दिल दिखाते हुए खुद ही पहल करनी चाहिए और मस्जिद का कब्जा मंदिर को दे देना चाहिए। उनका यह काम विश्व में उनको सर्वोपरि बनाएगा।
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