Agra, Uttar Pradesh, India. फलों की ठेल लगाने वाले दो भाइयों ने नकली दवाइयों के कारोबार से सिर्फ दो साल में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। औषधि विभाग ने छापा मारा तो इस काले कारोबार का खुलासा हुआ। आगरा के बाद मथुरा के वृंदावन में भी छापामारी की गई। छापा की भनक लगते ही नकली दवाओं को जलाया जा रहा था, लेकिन पकड़े गए। एक्सपायरी दवाओं का रीपैकेजिंग कर ऊंचे दामों बेचा जाता था।
राजोरा डिस्ट्रीब्यूटर्स की नकली दवाइयां बनाने की फैक्ट्री मथुरा में है। ये दवाइयां नर्सिंग होम, चिकित्सकों के घरेलू मेडिकल स्टोर्स में जाती थीं। भारी मात्रा में अवैध दवाइयां बनाने और पैकेजिंग करने का सामान बरामद किया गया है। मुंबई के मैनुफैक्चरिंग लाइसेंस पर मथुरा में अवैध रूप से दवाइयां बन रही थीं। इस छापामारी से साफ हो गया है कि करोड़पति बनना है तो दवाइयों का काम करो।
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन के नेतृत्व में ड्रग इंस्पेक्टर नोएडा, बुलंदशहर, मथुरा, हाथरस, फ़िरोज़ाबाद की टीम ने की आवास विकास कालोनी सेक्टर 12 स्थित सत्यम प्लाजा में सोमवार की दोपहर को छापा मारा। मार्केट के पिछले हिस्से में प्रथम तल पर राजौरा डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां छापा मारा। फर्म ने एक दुकान में कार्यालय और दूसरे में गोदाम बना रखा था। टीम ने वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ करने पर उसने बताया कि फर्म के मालिक प्रदीप और धीरज राजौरा हैं। दोनों सेक्टर आठ में रहते हैं। दोनों भाइयों को हिरासत में ले लिया गया है।
पुलिस अधीक्षक नगर बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि फर्म के बारे में शिकायत मिली थी कि नकली दवाओं को बेच रही है। एक्सपायरी डेट की दवाओं की रीपैकिंग करके उन्हें बाजार में बिक्री कर रही है। फर्म के मालिक सेक्टर आठ निवासी प्रदीप और धीरज राजौरा हैं। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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