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यूपी के जनपद महाराजगंज के गुमनामी के दिन बहुरने वाले है। पर्यटकों को आकर्षित करने और टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए जनपद के प्राकृतिक विरासत सोहगीबरवा वन्यक्षेत्र को पर्यटन के रुप में विकसित किया जा रहा है। सोहगी बरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए जंगल सफारी के बाद सैलानियों को देश की पहली ट्राम-वे रेल से वन क्षेत्र में सैर सपाटा का भी मौका मिलेगा।
इसके लिए डीपीआर बनाई जा रही है। माह के अंत तक डीपीआर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से शासन को भेज दिया जाएगा। डीपीआर को स्वीकृति मिलने के पूरे आसार हैं। फिल्मों और टीवी मे छुकछुक ट्रेन से रोमांचित होने वाले अब वास्तविक रुप मे ट्राम वे रेल का मजा ले सकेगे।
अंग्रेजों के समय में थी किया गया निर्माण
ब्रिटिश हुकूमत ने जंगल की संपदा को दुर्गम वन क्षेत्र से मुख्य रेल लाइन तक लाने के लिए वर्ष 1924 में भारत की पहली ट्राम-वे रेल परियोजना लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज के जंगल में चौराहा तक 22.4 किमी दूरी तक स्थापित किया था।
58 वर्ष सेवा देने के बाद बन्द हो गई थी ट्राम वे रेल
58 वर्ष की सेवा के बाद 1982 में करीब 8 लाख घाटे के चलते देश की पहली ट्राम-वे रेल को बंद कर दिया गया। अब इसे जंगल में चार किमी चलाने के लिए डीपीआर बनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास हुआ। शासन के निर्देश पर बार्डर एरिया डेवलपमेंट वर्ष 2015-16 के तहत विरासत स्थल के रूप में ट्राम-वे रेल परियोजना की सुरक्षा एवं ग्रामीण पर्यटन विकास लिए लक्ष्मीपुर के एकमा डिपो इंजन, टंडल, सैलून बोगी, स्पेशल बोगी, गार्डयान एवं अन्य उपकरणों को देखने के लिए रखा गया है। वर्ष 2008 व 2018 में ट्राम-वे रेल को फिर से चलाने की योजना बनी, लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई।
सेंचुरी से एक ट्राम वे रेल इंजन लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया
जंगल सफारी के लिए टूर आपरेटर एजेंसी के संचालक व सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञ ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2009 में सरकार के निर्देश पर एक इंजन, एक सैलून एवं एक बोगी को लखनऊ चिड़ियाघर में भेज दिया गया। जहां ट्राम का इंजन बाल रेल के रूप में चल रही है।
-एजेंसियां
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