Agra, Uttar Pradesh, India. कोरोना काल में लोगों के सामने आर्थिक संकट है। नौकरी छूट गई है। व्यापार ठप है। जमापूंजी भी नहीं है। ऊपर से कोरोना संक्रमित हो जाएं तो इलाज और इसके बाद की स्थिति से निपटने के लिए उधार लेना पड़ता है। अगर दोस्तों से उधारी चेक के माध्यम से ली है तो आपकी आय मानी जाएगी और आयकर देना होगा। ऋण के रूप में लिया है तो अलग बात है। हां, निकट के रिश्तेदार उपहार स्वरूप नकदी देते हैं तो उस पर कोई आयकर नहीं लगता है।
50 हजार के उपहार तक पर कर से छूट
आयकर विशेषज्ञ अनिल वर्मा एडवोकेट ने बताया कि आयकर कानून के हिसाब से एक व्यक्ति को सालभर में अधिकतम 50,000 रुपये मूल्य तक के उपहार पर ही कर से छूट मिलती है। परिवार का हर सदस्य साल में अधिकतम 50,000 रुपये तक कर मुक्त उपहार ले सकता है। फिर चाहे वह नकदी ही क्यों न हो। परिवार में पांच सदस्य हैं तो अधिकतम 2.5 लाख रुपये की मदद करमुक्त होगी। इससे अधिक ली गई रकम को आयकर विवरणी में दिखाना होगा और कर देना होगा।
इनसे ली गई नकदी आयकर दायरे में नहीं
श्री वर्मा ने बताया कि निकट के परिजनों से लिया गया उपहार या नकदी कर के दायरे में नहीं आती है। मतलब मदद पूरी तरह करमुक्त होती है। निकट के रिश्तेदारों में भाई-बहन, माता-पिता, माता-पिता के भाई-बहन और इन सभी के जीवनसाथी शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि कोरोना महामारी में सरकार ने अस्पतालों को छूट दी है कि वे दो लाख रुपये से अधिक नकद राशि स्वीकार कर सकते हैं। पहले दो लाख रुपये से अधिक नकद लेने का प्रावधान नहीं था। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी प्रकार के करअपवंचना नहीं करनी चाहिए। प्रत्येक लेन-देन पर सरकार की निगाह रहती है। अगर करअपवंचना में पकड़े गए तो भारी जुर्माना लगता है।
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