नई दिल्ली। कैश फॉर जॉब घोटाले में गिरफ्तार तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले से सहमत था, जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री यह तय कर सकते हैं कि सत्तारूढ़ द्रमुक के मंत्री बालाजी को “राज्य मंत्रिमंडल में बिना पोर्टफोलियो वाले मंत्री” के रूप में नवीनीकृत किया जाना चाहिए या नहीं.
न्यायमूर्ति अभय श्रीनिवास ओका की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “हाईकोर्ट इस पर विचार करने के लिए सही था कि क्या राज्यपाल के पास किसी मंत्री को बर्खास्त करने की शक्ति है और यह निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री पर छोड़ दिया गया कि संबंधित व्यक्ति को मंत्री के रूप में जारी रहना चाहिए या नहीं.”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमें नहीं लगता कि इसमें हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश है. हम मद्रास उच्च न्यायालय के विचार से सहमत हैं और किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.’ सामाजिक कार्यकर्ता एमएल रवि ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी के बावजूद बालाजी तमिलनाडु सरकार में मंत्री बने रह सकते हैं.
– एजेंसी
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