गोंडा: भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से पूर्व लोकसभा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने देश में धड़ल्ले से बिक रहे मिलावटी खाद्य पदार्थों और एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गोंडा में एक छात्र सम्मान समारोह के दौरान मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के बाद उन्होंने मंच से सेहत, स्वदेशी और वर्तमान राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
नकली खाद्य पदार्थों और मिलावटखोरी पर गहरी चिंता
बृजभूषण शरण सिंह ने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को खुद समझना होगा कि वे थाली में क्या खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश में मिलावटखोरी के खिलाफ ईमानदारी से अभियान चला दिया जाए, तो पूरे देश में हाहाकार मच जाएगा। उन्होंने गणित का उदाहरण देते हुए समझाया कि 65-70 रुपये प्रति किलो मिलने वाली सरसों से जब साढ़े तीन किलो में एक किलो तेल बनता है, तो बाजार में 150 रुपये से 200 रुपये में शुद्ध तेल कैसे मिल सकता है?
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वे 20 साल से नकली घी, तेल और मावे का मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन अब जाकर डब्ल्यूएचओ और सरकार चेती हैं। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था, क्योंकि आज घर-घर में कैंसर जैसी घातक बीमारियां फैल रही हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव पर तीखा हमला
आंदोलन की बात करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव पर निशाना साधते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने पुरानी बातों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जो बाबा स्वदेशी का नारा लेकर निकले थे, वे आज विदेशी शैली के अंडरगारमेंट्स तक बेचने लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आंदोलन की बात करने वाले मैदान में आएं, लेकिन लोग भूले नहीं हैं कि वे कैसे सलवार-सूट पहनकर भागे थे।
किसानों के हक और विपक्ष पर कड़ा प्रहार
चीनी की कीमतों के मुद्दे पर उन्होंने किसानों का खुलकर पक्ष लिया। उनका कहना था कि जब डीजल, पेट्रोल, ट्रैक्टर और मोटरसाइकिलों के दाम बढ़ रहे हैं, तो अगर किसान की चीनी थोड़ी महंगी हो जाती है तो इस पर हंगामा क्यों मचता है?
वहीं, विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि आज विपक्ष भ्रमित होकर केवल उछल-कूद कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए मासूम छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहा है। अन्ना हजारे के पुराने आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस आंदोलन से दिल्ली की राजनीति में क्या निकला, यह सब देश देख चुका है। किसी भी समस्या का स्थायी समाधान सिर्फ आंदोलनों से नहीं होता।
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