आगरा: ताजनगरी में मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ विरोध की ज्वाला तेज हो गई है। डॉ. मदन मोहन शर्मा के नेतृत्व में परशुराम चौक पर ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने अनोखा और उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कड़ाके की ठंड के बावजूद अर्धनग्न होकर और शंखनाद कर फिल्म के शीर्षक और कथानक के प्रति अपना गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
आस्था और पहचान का अपमान
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि फिल्म का शीर्षक ‘पंडत’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोड़कर पूरी कौम और सनातन परंपरा को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बॉलीवुड बार-बार एक विशेष वर्ग की धार्मिक पहचान को भ्रष्टाचार और नकारात्मकता के साथ जोड़कर पेश करता है, जिसे अब और स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोर्ट तक जाएगी लड़ाई
समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि फिल्म का नाम तुरंत नहीं बदला गया, तो वे न केवल सड़क पर आंदोलन करेंगे बल्कि मामले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उन्होंने फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की भी बात कही है। मौके पर “सनातन धर्म पर हमला बर्दाश्त नहीं” जैसे नारों से माहौल पूरी तरह गरमाया रहा।
सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा नेता अपर्णा यादव ने इस फिल्म को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि जिस समाज ने सनातन संस्कृति को जीवित रखा, उसे इस तरह चित्रित करना गलत है। वहीं, विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने इसे सामाजिक ताने-बाने के साथ घृणित खिलवाड़ बताया। विवाद में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन किया है।
योगी सरकार का कड़ा रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर लखनऊ में फिल्म के डायरेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की, जिसके बाद सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को विवादित टाइटल हटाने का निर्देश जारी किया।
बैकफुट पर फिल्म मेकर्स
लगातार बढ़ते विरोध के बाद निर्देशक नीरज पांडेय और रीतेश शाह ने फिल्म का सारा प्रमोशनल मटेरियल सभी प्लेटफॉर्म्स से हटाने का निर्णय लिया है। बता दें कि फिल्म में मनोज बाजपेयी एक विवादित पुलिस अधिकारी ‘अजय दीक्षित’ की भूमिका में हैं, जिसे ‘पंडत’ के नाम से जाना जाता है।
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