वाराणसी : धर्म की नगरी काशी के श्रीविद्या मठ में फाल्गुन कृष्ण पंचमी के शुभ अवसर पर एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘1008’ जी महाराज के संरक्षण में संचालित ‘जगद्गुरुकुलम्’ के 49 छात्रों का सामूहिक उपनयन संस्कार विधि-विधान से पूर्ण किया गया।
असम से काशी तक: एक नन्हा सफर सनातन की ओर
इस दीक्षा समारोह में असम से आए 7 वर्षीय छात्र अथर्व कश्यप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। अथर्व सहित कुल 49 बटुकों ने पण्डित श्री रामचन्द्र देव जी एवं अन्य विद्वान आचार्यों के सानिध्य में यज्ञोपवीत धारण किया। ये छात्र अब वेदाध्ययन के माध्यम से समाज को सनातन धर्म के शाश्वत मार्ग पर ले जाने के लिए तैयार होंगे।
हर जिले में निःशुल्क गुरुकुल का विजन
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का लक्ष्य पूरे देश में भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करना है। वर्तमान में वे देश भर में ‘जगद्गुरुकुलम्’ की 10 से अधिक शाखाएं संचालित कर रहे हैं। उनका संकल्प है कि भारत के हर जिले में कम से कम एक निःशुल्क गुरुकुल हो, ताकि सनातन धर्म की शिक्षा हर हिंदू बालक को सहजता से प्राप्त हो सके।
गंगा तट पर मंत्रोच्चार और आशीर्वाद
उपनयन संस्कार का मुख्य आयोजन गंगा तट स्थित श्रीशंकराचार्य घाट पर हुआ। मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानन्द जी ने सभी बटुकों को पवित्र गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। कार्यक्रम के सफल संयोजन में प्रबन्धक श्री कृष्ण कुमार द्विवेदी एवं उप प्राचार्य श्री आर्यन सुमन पांडेय का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में सभी उपनीत छात्रों ने पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज से शुभाशीर्वाद प्राप्त किया।
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