लखनऊ: करीब दो साल बाद जेल से बाहर आए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने अपने भविष्य और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। लंबे समय से बसपा में उनके जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन आज़म ख़ान ने इन चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सब बचपने की बातें हैं।
एक हिन्दी अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, “मुझे तो मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद ही राजनीति छोड़ देनी चाहिए थी, लेकिन मैं खुदगर्ज हो गया। वजह यह थी कि लोगों का दर्द आंखों में था और कुछ काम अधूरे थे। इन्हें पूरा करने की खुदगर्जी ने हमें बहुत जलील कराया। अब तो ओखली में सिर दे दिया है, तो मूसल से क्या डरना।”
रामपुर की हालत पर चिंता जताते हुए आज़म ने कहा कि बीते 10 सालों में हालात काफी बिगड़ गए हैं। अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह नवाबों से लड़कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं, जबकि नवाब तो कभी रानी विक्टोरिया के बराबर बैठा करते थे। उन्होंने नवाबों पर आरोप लगाया कि उनकी गद्दारी की वजह से ही देश की आज़ादी 1947 तक टल गई थी।
बसपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए आज़म ने साफ कहा कि वह पहले भी सपा से खुद नहीं गए थे, बल्कि मुलायम सिंह यादव की मजबूरी में निकाले गए थे। बाद में मुलायम सिंह ने उन्हें मोहब्बत से वापस लिया। आज़म ने कहा कि मुलायम सिंह और उनका रिश्ता राजनीति से परे था।
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