आगरा के साहित्य का सितारा: डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ को मिला ‘ब्रजभाषा विभूषण’ सम्मान, शहर में खुशी की लहर
ब्रजभाषा के सपूत को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान
आगरा। साहित्य की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे शहर को गर्व से भर दिया है। आगरा के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ को प्रतिष्ठित संस्था ‘साहित्य मण्डल’ श्रीनाथद्वारा (राजस्थान) द्वारा ‘ब्रजभाषा विभूषण’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 8-9 फरवरी को आयोजित पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह 2026 के दौरान प्रदान किया गया।
यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि ब्रजभूमि की आत्मा को समर्पित साहित्य साधना का राष्ट्रीय स्वीकार है।
पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह में मिला गौरव
राजस्थान के श्रीनाथद्वारा में आयोजित भव्य समारोह में देशभर के साहित्यकारों की उपस्थिति रही। इसी गरिमामय मंच पर आगरा की साहित्यिक संस्था ‘ब्रजभाषा काव्य मंच’ के संस्थापक व अध्यक्ष डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ को ब्रजभाषा साहित्य में उनके अनुपम योगदान के लिए अलंकृत किया गया।
‘ब्रजभाषा विभूषण’ की मानद उपाधि पाकर उन्होंने न केवल अपने व्यक्तिगत साहित्यिक जीवन को गौरवान्वित किया, बल्कि आगरा शहर को भी राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर और अधिक चमकाया।

ब्रजभाषा काव्य मंच के माध्यम से सतत साहित्य साधना
विगत कई वर्षों से डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ ब्रजभाषा काव्य मंच के माध्यम से देशभर के ब्रजभाषा और हिंदी साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कविता, गीत, गजल, छंद और पारंपरिक काव्य विधाओं के संरक्षण व संवर्धन के लिए सतत प्रयास किए हैं।
आज जब नई पीढ़ी डिजिटल युग में अपनी भाषाई जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे समय में उनका यह अभियान किसी सांस्कृतिक आंदोलन से कम नहीं है।
शहरभर में बधाइयों का तांता
जैसे ही सम्मान की खबर आगरा पहुँची, साहित्य जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई। शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई दी और इसे ब्रजभाषा प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस परंपरा का है जो सूर, बिहारी और रसखान की धरती से आज भी जीवित है।
संपादकीय: शब्दों के शिल्पी, ब्रज की आत्मा के प्रहरी – डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’
आज जब साहित्य की दिशा बदल रही है, मंचों पर शोर अधिक और सार कम दिखाई देता है, ऐसे समय में डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ जैसे साहित्यकार आशा की लौ हैं। उन्होंने ब्रजभाषा को केवल लिखा नहीं, जिया है।
वे उन विरले साहित्यकारों में हैं जो परंपरा की जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता की राह भी दिखाते हैं। ब्रजभाषा काव्य मंच के माध्यम से उन्होंने जो सांस्कृतिक सेतु बनाया है, वह साधारण कार्य नहीं है। यह एक मिशन है—अपनी भाषा, अपनी मिट्टी और अपनी अस्मिता को बचाने का।
आगरा, जो ताजमहल के लिए विश्व प्रसिद्ध है, आज साहित्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय पहचान बना रहा है—और इसमें डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे न केवल कवि हैं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ता भी हैं।
उनकी लेखनी में परंपरा की मिठास है, समकालीन संवेदना है और भविष्य की दृष्टि भी। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि समर्पण सच्चा हो तो क्षेत्रीय भाषा भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान पा सकती है।
ऐसे साहित्य साधक पर आगरा को गर्व है। सच कहा जाए तो डॉ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ आगरा का नाम पूरे देश में रोशन कर रहे हैं—और यह शुरुआत भर है। आने वाले समय में उनका साहित्य और भी ऊँचाइयों को छुएगा, ऐसी अपेक्षा ही नहीं, पूरा विश्वास है।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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