नौनिहाल महोत्सव: देश का भविष्य मोदी के और नौनिहालों का भविष्य बैजन्ती देवी इंटर कॉलेज आगरा के हाथ
आप यह शीर्षक पढ़कर अपना माथा पकड़कर बैठ सकते हैं। आपको लग सकता है कि चमचागिरी की पराकाष्ठा पार कर दी। पर मैं इतना जानता हूं कि अगर आप भी मेरे साथ होते तो यही लिखते।
पत्रकार का स्वभाव भी है, दायित्व भी है और धर्म भी है कि जैसा देखा जाए वैसा लिखा जाए। इसलिए जो देखा वही लिख रहा हूं। यह बात इसलिए नहीं कि मैं वहां मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित था बल्कि इसलिए कि पत्रकार जो देखे वह लिखे, अच्छा देखे तो अच्छा भी हिम्मत के साथ लिखे, छिद्रान्वेषण तो हम करते ही रहते हैं।

आयोजन स्थल और अवसर
मैं बात कर रहा हूं आगरा में गढ़ी भदौरिया स्थित श्रीमती बैजंती देवी इंटर कॉलेज
के प्राइमरी सेक्शन की। शनिवार को नर्सरी से कक्षा तीन तक के नौनिहालों के लिए स्कूल परिसर में नौनिहाल महोत्सव आयोजित किया गया। बच्चों ने धमाल मचा दिया।

नन्हे बच्चों का अद्भुत प्रदर्शन
जो बच्चे घर में पूरी तरह माता-पिता पर आश्रित रहते हैं उन्होंने वह सब किया जो बड़े बच्चे कर सकते हैं। नृत्य, संगीत, हिंदी और अंग्रेजी में संभाषण, खेल प्रतियोगिता — सब कुछ मनभावन।
जो बच्चे अपनी पॉटी भी साफ नहीं कर पाते, उन बच्चों से नृत्य कराना एक बड़ी चुनौती है।

नर्सरी के बच्चों ने सबको चौंकाया
बैग लगाओ प्रतियोगिता
इस चुनौती को जब बच्चों ने “बैग लगाओ प्रतियोगिता” में भाग लेकर स्वीकार किया तो सब देखते रह गए। इसके माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि बच्चों को अपना बैग स्वयं लगाना चाहिए। अभिभावकों को सीख दी गई कि वह बच्चों को ही बैग लगाने दें ताकि उन्हें अपना काम करने की आदत हो सके। विजेता बच्चों के साथ उनके माता-पिता को भी सम्मानित किया गया।

होली का रंग और संस्कार
सबसे अंत में भारी आई होली की। बच्चों के समूह ने होली नृत्य प्रस्तुत करके सबको होली के रंग में रंग दिया। सभी दर्शकों को चंदन लगाकर होली का सम्मान दिया गया।
यह दृश्य बताता है कि शिक्षा केवल किताबों से नहीं, संस्कृति और संस्कारों से भी मिलती है।

विद्यालय प्रबंधन की सराहना
वैजयंती देवी स्कूल के निदेशक श्री नितेश शर्मा और श्री तपेश शर्मा के प्रति मैं अत्यंत आभार प्रकट करता हूं। उनकी सराहना करता हूं कि वह बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और अनुशासन का पाठ बखूबी पढ़ा रहे हैं।

मेरा ऐसा मानना है कि अगर बच्चे में अनुशासन और संस्कार नहीं है तो वह कितनी भी डिग्रियां प्राप्त कर ले, कभी भी सफल नहीं हो सकता और समाज के लिए उपयोगी नहीं हो सकता।
संस्कारित बच्चे ही बुढ़ापे की लाठी बनते हैं।
संस्थापक और प्रगति
श्री विद्या शंकर शर्मा द्वारा स्थापित यह विद्यालय
श्री नितेश शर्मा
और
श्री तपेश शर्मा
के संरक्षण में नित्य प्रति आगे बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त होने के बाद भी 1500 से अधिक बच्चे यहां शिक्षारत हैं। दोनों भाइयों की जोड़ी राम-लक्ष्मण की तरह है।

बचपन की याद
नौनिहाल महोत्सव देखकर मुझे अपना बचपन याद आ गया। एक समय था जब हम स्कूल जाते थे तो साथ में अपना थैला और लकड़ी की पट्टी लेकर जाते थे। मस्साब की पिटाई भी खाते थे। अक्सर मुर्गा बनवाए जाते थे। घर में शिकायत की तो पिताजी स्कूल जाकर और पिटवाते थे। अब स्कूलों में संसाधन बढ़ गए हैं, लेकिन मास्टर अगर पिटाई कर दे तो हंगामा हो जाता है।
पत्रकारों की उपस्थिति
वरिष्ठ पत्रकार विवेक जैन ने नौनिहाल महोत्सव को अद्भुत आयोजन बताया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ पत्रकार डॉ भानु प्रताप सिंह और विवेक जैन ने की।
विद्यालय की प्रेस विज्ञप्ति
नौनिहालों ने कविता पाठ, समूह गान, नृत्य, नाटक और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अभिभावकों के साथ फूलों की होली खेलना सबका मन मोह लेने वाला क्षण रहा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

प्रधानाचार्य का वक्तव्य
प्रधानाचार्य प्रीति अरोड़ा ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास, मंच कौशल और अनुशासन की भावना विकसित करते हैं। संचालन
श्रुति चोपड़ा
और
भावना शर्मा
ने किया।
निदेशक तपेश शर्मा,
नितेश शर्मा,
संस्थापिका सुशीला शर्मा,
प्रबंधक योगेश शर्मा,
प्रधानाचार्य आरडी कटारा आदि मौजूद रहे।

संपादकीय: संपादकीय: देश का भविष्य मंच पर मुस्कुरा रहा था
जब छोटे-छोटे बच्चे मंच पर आत्मविश्वास से खड़े होते हैं, तो समझ लीजिए कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
आज के दौर में शिक्षा केवल किताबों और अंकों की दौड़ बनती जा रही है। लेकिन अगर विद्यालय बच्चों में आत्मनिर्भरता, अनुशासन और संस्कृति का बीज बो रहा है, तो वह सिर्फ विद्यार्थी नहीं, नागरिक तैयार कर रहा है।
नौनिहाल महोत्सव ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर जड़ें मजबूत हैं तो पेड़ आंधियों में भी अडिग रहेगा। आगरा जैसे शहर में ऐसे प्रयास उम्मीद की रोशनी हैं।
यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था—यह भावी भारत की झलक थी।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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