आगरा। कोचिंग संस्थानों पर विद्यार्थियों की बढ़ती निर्भरता को कम करने और स्कूली शिक्षा को फिर से केंद्र में लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के निर्णय का असोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा (अप्सा) ने स्वागत किया है। अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने इसे माध्यमिक शिक्षा के लिए संजीवनी बताया और उम्मीद जताई कि अब छात्रों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि देश में जिस तेज़ी से कोचिंग इंडस्ट्री फैली है, उसने औपचारिक स्कूलिंग को लगभग हाशिए पर ला दिया था। डमी स्कूल और परीक्षा केंद्रों की तरह रह गए स्कूलों की स्थिति में सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं कोचिंग के दबाव में न केवल अपनी रचनात्मकता और मानसिक संतुलन खो रहे हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन से भी कटते जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित इस समिति को कोचिंग निर्भरता के विविध पहलुओं पर गहन विचार करना है, जिनमें शामिल हैं-
-वर्तमान स्कूली शिक्षा प्रणाली की कमियां जो कोचिंग को जन्म देती हैं।
-डमी स्कूलों का उभरना और उन्हें नियंत्रित करने के उपाय।
-निर्माणात्मक मूल्यांकन (फॉर्मेटिव असेसमेंट) की भूमिका और उसकी अनुपस्थिति के प्रभाव।
-प्रतियोगी परीक्षाओं में सीमित सीटों के कारण उत्पन्न दबाव और कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता।
-अभिभावकों व छात्रों में करियर विकल्पों को लेकर जागरूकता की कमी और उसका प्रभाव।
-भ्रामक विज्ञापन और सफलता के झूठे दावों की समीक्षा तथा उन्हें रोकने के लिए नियामक तंत्र का प्रस्ताव।
-स्कूलों में प्रभावी करियर परामर्श सेवाओं की उपलब्धता और उसमें सुधार के सुझाव।
समिति की संरचना भी विविध और विशेषज्ञता से परिपूर्ण रखी गई है। इसके अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी, सचिव, उच्च शिक्षा विभाग होंगे। इसके अलावा सीबीएसई, एनसीईआरटी, आईआईटी, एनआईटी और स्कूलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
डॉ. सुशील गुप्ता ने याद दिलाया कि 16 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार ने कोचिंग के संचालन पर दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन राज्यों पर उसके अनुपालन का जिम्मा छोड़ा था। उस समय उन्होंने केंद्रीय नियमावली की आवश्यकता जताई थी, जिससे पूरे देश में एक समान प्रभाव सुनिश्चित हो सके। 17 जून 2025 को आए इस नए आदेश को उन्होंने दूरदर्शी और ठोस कदम बताते हुए सरकार की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यदि समिति सिफारिशों को गंभीरता से लागू किया गया तो शिक्षा प्रणाली में संतुलन, गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य, तीनों स्तर पर व्यापक सुधार होंगे।
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