आगरा। शास्त्रीपुरम, सिकंदरा निवासी स्वर्गीय किशोर के 15 वर्षीय एकलौते पुत्र धीरज के जीवन में रविवार का दिन नई उम्मीद और खुशियों की रोशनी लेकर आया। जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ धीरज को चिकित्सकों ने कान की मशीन लगाने की सलाह दी थी, लेकिन करीब 70 हजार रुपये की लागत उसके परिवार के लिए जुटा पाना असंभव था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार लंबे समय से निराशा और संघर्ष के दौर से गुजर रहा था।
जब यह पीड़ा सामाजिक संस्था हेल्प आगरा के संज्ञान में आई, तो संस्था ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए दानदाताओं के सहयोग से धीरज को कान की मशीन उपलब्ध कराकर उसके जीवन में नई शुरुआत का मार्ग खोल दिया।
सादे कार्यक्रम में सौंपा गया सहारा
रविवार को हेल्प आगरा कार्यालय पर आयोजित सादे एवं भावनात्मक कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने सहयोगियों की उपस्थिति में धीरज को कान की मशीन प्रदान की। मशीन पाते ही धीरज के चेहरे पर जो मुस्कान आई, उसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। वहीं धीरज की माता कंचन मयानी की आंखों में संस्था और सहयोगकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता के भाव साफ नजर आए।
14 साल पहले उठा पिता का साया, मां करती हैं मेहनत-मजदूरी
उल्लेखनीय है कि करीब 14 वर्ष पूर्व धीरज के सिर से पिता का साया उठ गया था। मां कंचन मयानी घर-घर जाकर खाना बनाने का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। परिवार में धीरज की एक बहन भी है। सीमित आय के चलते इलाज और जरूरी उपकरण जुटाना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था।
दानदाताओं ने निभाई अहम भूमिका
इस पुनीत कार्य में जैन मिलन सोसाइटी, राजकुमार विजय, सुरेश चंद, आर.एस. रावत तथा एक अन्य समाजसेवी ने गुप्त रूप से सहयोग कर धीरज के लिए आशा की किरण बनकर सामने आए।
गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जैन मिलन के पदाधिकारी व सदस्य, हेल्प आगरा के पूर्व महासचिव किशन अग्रवाल, उपाध्यक्ष विशेष बंसल, मंत्री नितिन अग्रवाल, गोपाल बंसल, राजीव गुप्ता, पीआरओ जगवीर सिंह, मीडिया प्रभारी नंदकिशोर गोयल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह पहल न केवल धीरज के लिए जीवन का नया रास्ता बनी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि सामूहिक सहयोग और संवेदना से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
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