आगरा। किसी भी देश में पत्रकार की कलम को देश की आवाज व धड़कन कहा जाता है लेकिन बदलते परिदृश्य में कलम और कलमकार भी सुरक्षित नहीं हैं। आज के दौर में पत्रकार पर सरकारी तंत्र का दबाव रहता है और शासन प्रशासन की आंखें टेढ़ी रहती हैं। उसका स्वच्छंद रूप से लिखना एक अपराध की श्रेणी में माना जाने लगा है। इससे आधुनिक पत्रकारिता की भाषा ही बदल गई है।
पिछले कुछ सालों में जिस प्रकार की घटनाएं पत्रकारिता जगत के साथ हो रही है, उसने निश्चित तौर पर आज के माहौल को बदल दिया है। बीते सालों में शासन प्रशासन द्वारा पत्रकारों पर कई प्रकार की कार्रवाई की गई जिसके चलते हाल ही में कोर्ट को दखल देना पड़ा। पत्रकारों पर सरकार व अधिकारियों की मशीनरी द्वारा बनाए गए दबाव की परिणिति यह है कि जहां पत्रकार सच्चाई लिख नहीं सकता और आम जनमानस के खिलाफ हो रही गलत का आपको उजागर नहीं कर सकता।
अनावश्यक दबाव की परिणिति यह है कि अब हर शहर के दबंग और गुण्डा तत्व भी पत्रकारों से सीधी दुश्मनी मान रहे हैं। इसी की परिणिति हुई दो दिन पूर्व टीएनएफ टुडे के प्रधान संपादक धीरज शर्मा जी के साथ हालात और वस्तुस्थिति यहां तक आ पहुंची। उन पर जानलेवा हमला हुआ है।
दो दिन पूर्व धीरज शर्मा अपने आफिस से घर आ रहे थे। उसी दौरान उनकी गाड़ी तोड़ी गई और उन पर हमला हुआ धीरज शर्मा द्वारा 112 और 2 ताजगंज के सीयूजी नंबर पर क किया गया लेकिन कनेक्टिविटी हुई। मामला थाना ताजगंज की एक पुलिस चौकी के अंतर्गत रिंग रोड सर्विस रोड पर हुआ है। हमलावर जबरन उनकी गाड़ी रोककर हमला किया। किसी तरह धीरज शर्मा संघर्ष कर अपनी जान बचाई। मामले में थाना ताजगंज एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
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