
आगरा: ताज महोत्सव के रंगारंग कार्यक्रमों के बीच ‘ब्रज बुक क्लब’ ने संस्कृति भवन में एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया। ‘सामाजिक समरसता के आलोक में स्वत्व’ विषय पर केंद्रित इस चर्चा में वक्ताओं ने गौमाता के धार्मिक महत्व के साथ-साथ उनके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर गहरा प्रकाश डाला। इस दौरान हाल ही में चर्चा में आई फिल्म ‘गोदान’ की समीक्षा भी की गई।
“वाहनों के लिए गैराज तो गाय के लिए गौशाला क्यों नहीं?”
मुख्य वक्ता और आरएसएस के क्षेत्र संयोजक हरीशंकर शर्मा ने समाज को झकझोरते हुए कहा कि यदि हम आधुनिकता की दौड़ में अपनी गाड़ियों के लिए गैराज बना सकते हैं, तो अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए एक छोटी गौशाला क्यों नहीं बना सकते? उन्होंने पंचगव्य और गौ-चिकित्सा के फायदों को गिनाते हुए बताया कि कैसे गौ-आधारित उत्पाद स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए वरदान हैं।
आर्थिक समृद्धि का माध्यम बनेगी गौसेवा
संगोष्ठी में गौसेवी संजय शर्मा ने बताया कि गौघृत (गाय का घी) और अन्य गौ-उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। वहीं, भाजयुमो नेता गौरव रजावत ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए घोषणा की कि वे युवाओं को गौसेवा से जोड़ने के लिए छात्र-छात्राओं को ‘गोदान’ फिल्म निःशुल्क दिखाएंगे।
कानूनी पक्ष और सामाजिक संदेश
एडीजीसी मंगल उपाध्याय ने गोवंश संरक्षण से जुड़े कानूनी पहलुओं पर जानकारी दी, जबकि हिमांशु ठाकुर ने फिल्म ‘गोदान’ के जरिए सामाजिक बुराइयों और गौ-महत्व के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को गौ-संस्कृति पर आधारित पुस्तकें भेंट की गईं।
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