आगरा शहर से साइबर ठगी का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहाँ सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशी क्रिप्टो मार्केट में निवेश करने का लालच देकर एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई।
ठगों ने पहले उनसे लगभग 9 लाख रुपये का शुरुआती निवेश कराया, और इसके बाद कनवर्जन फीस तथा बैंक से रकम मिलने के नाम पर क्रमशः 3.44 लाख और 3.65 लाख रुपये की भारी-भरकम सिक्योरिटी फीस वसूल ली। दुर्भाग्यवश, बुजुर्ग की मृत्यु के बाद जब उनके बेटे ने उनके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच की, तब जाकर इस बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।
सोशल मीडिया के जरिए बुना गया ठगी का जाल
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुजुर्ग से संपर्क साधा था। उन्हें विदेशी क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में निवेश करने पर बेहद शानदार और बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया गया। शातिर ठगों की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर बुजुर्ग ने विश्वास कर लिया और शुरुआत में लगभग 9 लाख रुपये का निवेश कर दिया।
इसके बाद जब बुजुर्ग ने अपनी निवेश की गई रकम को वापस निकालने का प्रयास किया, तो ठगों ने नए-नए और मनगढ़ंत बहाने बनाने शुरू कर दिए। आरोपियों ने बुजुर्ग से कहा कि निवेश की गई उस रकम को उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए पहले ‘कनवर्जन फीस’ जमा करनी होगी। इस झूठे बहाने के तहत उनसे करीब 3.44 लाख रुपये और ऐंठ लिए गए। हालांकि, ठगों की भूख यहीं शांत नहीं हुई; इसके बाद बैंक से रकम रिलीज कराने के नाम पर उनसे 3.65 लाख रुपये की सिक्योरिटी फीस के रूप में भी ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। इस तरह विभिन्न मदों और बहानों के जरिए उनसे कुल मिलाकर लाखों रुपये ठग लिए गए।
मौत के बाद खुला राज और परिजनों की शिकायत
बुजुर्ग लंबे समय तक इस उम्मीद में रहे कि उनकी निवेश की गई रकम और उस पर मिलने वाला मुनाफा उन्हें वापस मिल जाएगा, लेकिन इसी मानसिक तनाव और असमंजस के बीच उनका निधन हो गया। पिता के देहांत के बाद जब उनके बेटे ने उनके बैंक खातों के रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन की जांच-पड़ताल की, तो कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए। जब उसने गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने वाले उन अज्ञात लोगों ने क्रिप्टो निवेश के नाम पर उनके दिवंगत पिता के साथ बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया था।
पुलिस जांच में जुटी
इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने तुरंत साइबर क्राइम थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने परिवार की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वर्तमान में पुलिस उन बैंक खातों की तकनीकी जांच कर रही है जिनमें ठगी की यह रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके साथ ही, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स की डिजिटल गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि यह ठगी की रकम किन-किन खातों तक पहुँची और इस संगठित नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल हैं। आरोपियों की तलाश के लिए साइबर सेल की टीमें लगातार डिजिटल साक्ष्यों पर काम कर रही हैं।
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