बर्मिंघम में लहराया आगरा का परचम: कवयित्री निशिराज जैन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला विश्व स्तरीय सम्मान

PRESS RELEASE

आगरा/बर्मिंघम। भारतीय साहित्य और संस्कृति को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करने वाली संस्था ‘गीतांजली मल्टीलिंग्विस्टिक सोसाइटी, यूके’ द्वारा हाल ही में बर्मिंघम में एक भव्य साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम में आगरा की सुप्रसिद्ध कवयित्री, सुमधुर गायिका और ‘माधुर्य’ साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था की संस्थापक-अध्यक्ष निशिराज जैन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। पिछले 30 वर्षों से प्रवासी भारतीयों के बीच भारतीय भाषाओं के संरक्षण का कार्य कर रही इस संस्था ने निशिराज जैन के साहित्यिक योगदान को नमन करते हुए उनका विशेष सम्मान किया।

साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए विशेष सम्मान

बर्मिंघम में डॉ. शैलेंद्र एलन के भव्य फार्म हाउस पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी में निशिराज जैन का साहित्यप्रेमियों ने बेहद आत्मीयता के साथ स्वागत किया। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों को देखते हुए संस्था के पदाधिकारियों ने उन्हें ‘गीतांजली मल्टीलिंग्विस्टिक सोसाइटी, यूके’ की कॉम्प्लीमेंट्री सदस्यता प्रदान कर विश्व स्तर पर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक डॉ. कृष्ण कुमार, परवेज मुजफ्फर, कार्यक्रम संयोजक डॉ. शैलेंद्र एलन, डॉ. राजीव, मधु शर्मा, उमेश जी, स्वर्ण तलवार, प्रतिमा, अलका, इंदु और निशिराज के पति राजकुमार जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

​सारगर्भित समीक्षा और विद्वता से प्रभावित हुए श्रोता

मुख्य अतिथि के रूप में निशिराज जैन ने न केवल कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, बल्कि गोष्ठी में प्रस्तुत प्रत्येक रचना पर अपनी विद्वतापूर्ण और सारगर्भित टिप्पणियाँ भी दीं। उनकी सहज शैली और साहित्यिक गहराई ने उपस्थित रचनाकारों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संस्कृति के वैश्विक प्रचार पर निशिराज का उद्बोधन

अपने संबोधन में निशिराज जैन ने कहा कि विदेशी धरती पर भारतीय भाषाओं के प्रति इतना गहन समर्पण और प्रेम देखना सुखद और गर्व का अनुभव है। उन्होंने गीतांजलि संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “डॉ. कृष्ण कुमार और उनकी पूरी टीम भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को दुनिया के कोने-कोने में प्रतिष्ठित करने का बेहद महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।” उन्होंने इस सम्मान के लिए संस्था के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh