आगरा। दयालबाग में परम गुरु हुजूर डॉ. एम.बी. लाल साहब महाराज के वार्षिक भंडारे का आगाज़ पूरी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो गया है। देश-विदेश के कोने-कोने से पहुँचे श्रद्धालु यहाँ केवल प्रार्थना ही नहीं कर रहे, बल्कि खेतों में श्रमदान कर सेवा के भाव को चरितार्थ कर रहे हैं। इसी कड़ी में, गुरुवार से दयालबाग की लगभग 75 एकड़ उपजाऊ भूमि पर पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) धान की रोपाई का वृहद अभियान शुरू होने जा रहा है।
एग्रोइकोलॉजी और सेवा का मेल
इस विशेष कृषि अभियान की विशेषता इसकी ‘एग्रोइकोलॉजी’ आधारित पद्धति है। उत्तर अमेरिका और एशिया पैसिफिक सहित दुनियाभर से आए श्रद्धालु इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। कृषि, सेवा, अध्यात्म और वैज्ञानिक प्रशिक्षण का यह संगम दयालबाग की पहचान बन गया है।
खेतों में हो रहे श्रमदान के साथ-साथ यहाँ डेयरी प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हुजूर के निर्देशों के अनुरूप, गौशाला की गायों को प्राकृतिक वातावरण में खेतों के बीच लाकर दूध दुहने (मिल्किंग) का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें सत्संगियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
भक्ति गीतों से गूंजा वातावरण
खेतों में चल रहे सेवा कार्य के बीच अध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। गुरु महाराज प्रोफेसर सत्संगी साहब एवं परम रानी साहिबा की उपस्थिति में ‘संत सुपर ह्यूमन योजना’ के बच्चों ने एक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
बच्चों ने भारतीय लोक संगीत और भक्ति भजनों के माध्यम से परम गुरु डॉ. एम.बी. लाल साहब महाराज को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। “सुनो सुनो… परम गुरु डॉक्टर लाल साहब ने यूनिवर्सिटी बनवाई थी” और “रत्नांजली के बोल” जैसे भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
580 शाखाओं में लाइव प्रसारण
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की दिव्यता का अनुभव न केवल दयालबाग में मौजूद लोगों ने किया, बल्कि ‘ई-सत्संग कैस्केड’ के माध्यम से इसे दुनिया भर की 580 से अधिक शाखाओं में लाइव प्रसारित किया गया। लाखों श्रद्धालु इस प्रसारण से जुड़कर घर बैठे आध्यात्मिक वातावरण का हिस्सा बने।
भंडारे की रूपरेखा
दयालबाग प्रशासन ने जानकारी दी है कि परम गुरु हुजूर डॉ. एम.बी. लाल साहब महाराज का वार्षिक भंडारा रविवार, 12 जुलाई को खेतों में ही आयोजित किया जाएगा। आयोजन के दौरान सभी श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का उपयोग प्रमुख है। दयालबाग में इस समय का माहौल सेवा और भक्ति की उस परंपरा को दोहरा रहा है जो मानव मात्र के कल्याण के लिए समर्पित है।
- विश्वासघात के शिकार हुए चंपत राय? महंत कमल नयन दास के दावों से राम मंदिर ट्रस्ट में हलचल - July 7, 2026
- अमरनाथ यात्रा में भक्तों को बड़ा झटका: महज 5 दिनों में अंतर्ध्यान हुए बाबा बर्फानी, श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल - July 7, 2026
- काशी में राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा: मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ के बेटे की शादी में पहुंचे CM योगी, नवदंपति को दिया आशीर्वाद - July 7, 2026