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Agra, Uttar Pradesh, India. राष्ट्र संत नेपाल केसरी डॉ. मणिभद्र महाराज ने कहा कि समय के महत्व को जो व्यक्ति समझ ले, वही सबसे बड़ा ज्ञानी है। क्योंकि समय का सदुपयोग बहुत जरूरी है, वरना ये जिदंगी यूं ही गुजर जाएगी।
न्यू राजामंडी, आगरा के महावीर भवन में चातुर्मास के तहत आयोजित धर्म सभा में जैन मुनि ने कहा कि ये जो दिन, रात व्यतीत हो रहे हैं या जो समय गुजर रहा है, वह कभी लौट कर नहीं आता। बीते हुए समय को लौटाने की व्यवस्था भी नहीं है। बचपन के बाद जवानी चली गई, वह लौट कर नहीं आ सकती। उस समय का जो माहौल था, वह अब नहीं है। यदि कोई अपने जीवन की सारी दौलत दे दे तो भी बचपन लौट कर नहीं आ सकता।
जैन मुनि ने कहा कि भगवान महावीर फरमाते हैं कि अधर्म में जो दिन-रात व्यतीत हो रहे हैं, वे व्यर्थ जा रहे हैं। जो धार्मिक कार्य में जुटे रहते हैं, उनका जीवन सफल होता है। समय के महत्व को जो समझे, वही ज्ञानी है। उन्होंने कहा कि हम दूसरे के जीवन में झांकने की कोशिश तो करते हैं, अपने बारे में सोचें तो बहुत सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा है कि शास्त्रों को पढ़ने वाला पंडित नहीं कहलाता। शास्त्र पढ़ना स्वाध्याय कहलाता है। यानि वह आत्म कल्याण के लिए शास्त्रों का अध्ययन कर रहा है। लोगों का चाहिए कि वे स्वाध्याय के लिए शास्त्रों को पढ़ें ताकि आत्म कल्याण हो।
जैन मुनि ने कहा कि संसार के प्रति आसक्ति नहीं होनी चाहिए। वैराग्य तैयारी करके नहीं आता। वह तो अचानक भावनाएं बदल जाती है तो वैराग्य का रूप ले लेता है। इसलिए समय का सदुपयोग करना चाहिए। जो व्यक्ति सिस्टम से चलता है, उसे कभी तनाव नहीं रहता। हम अधर्म तो जीवन भर करते हैं, धर्म के कामों को टालते रहते हैं। जब वृद्धावस्था आती है तो हम धर्म करने की सोचते हैं, तब धर्म करने की पर्याप्त शक्ति नहीं होती। यदि आप जागरूक होंगे तो मृत्यु के समय भी बूढ़े नहीं होंगे। जीवन को सार्थक बनाना है तो धर्म के लिए समय निर्धारित मत करो। जब समय मिले, तभी धर्म करना चाहिए, यही सारे शास्त्र कहते हैं।
शनिवार की धर्मसभा में राजेश सकलेचा,राजीव चपलावत, वैभव जैन, रोहित दुग्गर, सचिन जैन, सुलेखा सुराना, मंगेश सोनी, पद्मा सुराना, श्रुति दुग्गर, पूजा जैन, महावीर प्रसाद जैन, अजय जैन आदि धर्मप्रेमी उपस्थित थे।
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