संत बातों ही बातों में ऐसी बातें कह जाते हैं जिसे हम समझ नहीं पाते हैं। मैं आजकल अमृत बचन राधास्वामी तीसरा भाग पढ़ रहा हूं। इस पुस्तक से ज्ञात हुआ कि राधास्वामी मत के अधिष्ठाता और गुरु दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) ने 21 साल पहले कोरोनावायरस (Coronavirus) की ओर इशारा किया था। उन्होंने अपने सतसंग में इसके फैलने के कारण भी बताया था। यहां सतसंग का वह भाग प्रस्तुत है जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि दादाजी महाराज ने कितनी गहरी बात कही थी। जो संतों के साथ हृदय से जुड़े होते हैं वे सार ग्रहण कर लेते हैं और सिर्फ कथा सुनने की मंशा से आने वालों की बुद्धि में कुछ भी नहीं समाता है।
यहां आपको यह जान लेना आवश्यक है कि हजूरी भवन, पीपलमंडी, आगरा राधास्वामी मत (Hazuri Bhawan, Peepal mandi, Agra) का आदि केन्द्र है। यहीं पर राधास्वामी मत (Radha Soami Faith) के सभी गुरु विराजे हैं। राधास्वामी मत के वर्तमान आचार्य और अधिष्ठाता दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) हैं, जो आगरा विश्वविद्यालय ) Agra University)के दो बार कुलपति रहे हैं। हजूरी भवन (Hazuri Bhawan) में हर वक्त राधास्वामी नाम की गूंज होती रहती है। दिन में जो बार अखंड सत्संग होता है। दादाजी महाराज ने राधास्वामी मत के अनुयायियों का मार्गदर्शन करने के लिए पूरे देश में भ्रमण किया। इसी क्रम में 25 अक्टूबर, 1999 को दादाजी महाराज अर्चित केमिकल्स लि. अजमेर रोड, ग्राम- बेरां, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान) में सतसंग के दौरान दादाजी महाराज (Dadaji maharaj Prof Agam Prasad Mathur) ने कोरोनावायरस फैलने की ओर इशारा किया था।
आज प्रकृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है और उसका नतीजा यह देखने के लिए मिलता है कि मानव संहार हो रहा है और खतरा है कि कभी ऐसा न हो जाए कि सारे पिंड देश में प्रलय हो जाए। जिन वैज्ञानिक चमत्कारों की प्रशंसा यह जीव करता है, प्रकृति ने झरने और नदियां बनाई हैं, मनुष्य को किसने यह हक दिया कि उनके ऊपर बांध बनाए। अगर वहां बांध बनाओगे तो बाढ़ भी आएगी और भूकम्प भी आएगा। उस कर्ता ने जिसने इस सारी सृष्टि की रचना की है, मनुष्य को यह अधिकार नहीं दिया कि वह उसकी बनाई हुई चीजों से खिलवाड़ करे। यह इंसान ऐसा है कि बुद्धि के बल पर प्रकृति के सौंदर्य और सौरमंडल तक से खिलवाड़ कर सकता है, लेकिन यह खिलवाड़ कब तक चलेगा।
प्रकृति का नियम है कि अगर तुम उससे छेड़छाड़ करोगे तो वह तुमसे बदला लेगा। अगर तुम निरीह जानवरों के साथ छेड़छाड़ करोगे तो वह तुमसे बदला लेंगे। अगर इस जन्म में तुमने किसी को मारा और खाया तो अगले जन्म के लिए तैयार हो जाओ कि वह तुम्हें मारेगा और खाएगा। प्रकृति के नियम को जिसमें चार खान की रचना की है, उसे पशु, पक्षी और वन्य जीव कोई भी प्राणी नहीं बिगाड़ता, केवल इंसान बिगाड़ता है।
उस खिलवाड़ के क्रम में वह एक बात भूल जाता है कि उसकी भी मृत्यु आवेगी, उसे भी सबकुछ यहां छोड़ना पड़ेगा औऱ उसके बाद उसका क्या हश्र होगा, इसका वह नहीं सोच करता। संत मत में इसी सोच पर बल दिया जाता है कि तुम कौन हो, कहां के हो, कहां आकर बसे हो और तुम्हारा दम यानी ताकत कितनी है तथा तुम्हारी बुद्धि में बल कितना है। (क्रमशः)
(अमृत बचन राधास्वामी तीसरा भाग, आध्यात्मिक परिभ्रमण विशेषांक से साभार)
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