सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की याचिकाकर्ता की मांग को नहीं माना। लेकिन पथराव के आरोपियों के घरों को ‘को ढहाने के लिए बुलडोजर के कथित इस्तेमाल पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान को नियम के अनुसार ही चलाने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत अतिक्रमण अभियान रोकने की जमायत उलेमा-ए-हिंद की दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए 3 दिन का वक्त दिया है।
जस्टिन एस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की वकेशन बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से हालिया अतिक्रमण अभियान को लेकर जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी कार्रवाई नियम के अनुसार ही चलनी चाहिए। गौरतलब है कि यूपी सरकार ने प्रयागराज हिंसा के मास्टमाइंड जावेद अहमद पंप के घर को गिरा दिया था।
यूपी सरकार को पिछले सप्ताह प्रयागराज की हिंसा के आरोपियों के घरों को अवैध रूप से गिराने का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। कोर्ट ने यूपी सरकार को अनधिकृत संरचनाओं को हटाने में कानून की प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सब कुछ निष्पक्ष दिखना चाहिए और कथित अनधिकृत संरचनाओं को केवल कानून के अनुसार ध्वस्त किया जाना चाहिए।
यूपी सरकार ने जमात उलेमा-ए-हिंद की याचिका का विरोध किया। यूपी सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि प्रयागराज हिंसा के मुख्य आरोपी को इस हिंसा से तीन महीने पहले मई में ही नोटिस जारी किया गया था। 25 मई अतिक्रमण हटाओ आदेश पारित किया गया था।
-एजेंसियां
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