आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के तहत गुरुवार को ताजनगरी का सियासी पारा अचानक काफी हाई हो गया। सपा के कलेक्ट्रेट घेराव के ऐलान के बाद सुबह से ही पुलिस-प्रशासन ने शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इसके बावजूद पार्टी कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देकर कलेक्ट्रेट तक पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को जब पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
सांसद रामजीलाल सुमन किए गए हाउस अरेस्ट
सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजीलाल सुमन को पुलिस ने उनके आवास पर ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया। इस कार्रवाई पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दबाने के लिए घर-घर जाकर नजरबंद कर रहा है। रामजीलाल सुमन ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “यह चुनाव आयोग नहीं, बल्कि मोदी आयोग बन गया है। हमारे घर पर भी पुलिस आकर बैठ गई है। लोकतंत्र के साथ यह भद्दा मजाक है।” सपा नेताओं का आरोप है कि रात से ही कई नेताओं के घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई थी, फिर भी कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
प्रशासन की कड़ी चौकसी और सीईसी के आवास की सुरक्षा
आगरा प्रशासन इस बार किसी भी बड़ी चूक के मूड में नहीं था। प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता 28 सितंबर की उस घटना की पुनरावृत्ति रोकना थी, जब कुछ प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास तक पहुंच गए थे। उस घटना के बाद से ही सीईसी (जिन्हेंेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है) के पैतृक आवास के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। गुरुवार के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के आसपास भी भारी बैरिकेडिंग और पुलिस फोर्स का कड़ा पहरा रहा।
कांग्रेस ने भी मनाया ‘काला दिवस’
सपा के अलावा कांग्रेस पार्टी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘काला दिवस’ मनाया। एआईसीसी के निर्देशों के तहत आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मताधिकार की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
गुरुवार को हुए इन प्रदर्शनों और पुलिस-कार्यकर्ताओं के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने यह साफ कर दिया है कि सीईसी के इस्तीफे का यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई बता रहा है, तो वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
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